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Naxal: शाह की 'जिद', 820 दिन में ढहेगा 'लाल आतंक' का आखिरी किला, '3-C' से टूटेगी नक्सलियों की कमर

जितेंद्र भारद्वाज
Updated Thu, 12 Dec 2024 07:53 PM IST

सार

Amit Shah: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 14 से 16 दिसंबर तक छत्तीसगढ़ के दौरे पर रहेंगे। अपनी यात्रा के दौरान, शाह रायपुर में एक सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करेंगे। छत्तीसगढ़ पुलिस को प्रेसिडेंट पुलिस कलर्स प्रदान करेंगे। नक्सल प्रभावित क्षेत्र जगदलपुर में भी गृह मंत्री पहुंचेंगे।
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह - फोटो : अमर उजाला


केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 14 से 16 दिसंबर तक छत्तीसगढ़ के दौरे पर रहेंगे। अपनी यात्रा के दौरान, शाह रायपुर में एक सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करेंगे। छत्तीसगढ़ पुलिस को प्रेसिडेंट पुलिस कलर्स प्रदान करेंगे। नक्सल प्रभावित क्षेत्र जगदलपुर में भी गृह मंत्री पहुंचेंगे। वहां पर शाह, आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों, स्थानीय लोगों और बुद्धिजीवियों के साथ बातचीत करेंगे। इसके बाद वे बस्तर ओलंपिक समापन समारोह में शामिल होंगे। जगदलपुर में ही वामपंथी उग्रवाद के पीड़ित परिवारों से भी शाह मुलाकात करेंगे। केंद्रीय गृह मंत्री शाह, घने जंगल में सुरक्षा शिविरों का दौरा करेंगे। वे सुरक्षा बलों के जवानों के साथ लंच भी करेंगे। 


बता दें कि केंद्र सरकार एवं राज्य, मार्च 2026 तक नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त करने के लिए कटिबद्ध हैं। शाह के मुताबिक, साल 2019 से मोदी सरकार ने माओवादियों को खत्म करने के लिए एक बहुकोणीय रणनीति पर अमल शुरू किया है। इसके तहत केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) की तैनाती के लिए वैक्यूम ढूंढे गए। जल्द ही इस प्लानिंग का सार्थक नतीजा भी सामने आ गया। इस साल 194 से अधिक कैंप स्थापित किए गए। पहले जहां 2 हैलीकॉप्टर्स जवानों की सेवा में तैनात थे, आज 12 हैलीकॉप्टर्स (6 बीएसएएफ और 6 एयरफोर्स) को नक्सल प्रभावित क्षेत्र में तैनात किया गया है। सरकार ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 3-C यानि रोड कनेक्टिविटी, मोबाइल कनेक्टिविटी और फाइनेंशियल कनेक्टिविटी को मजबूत किया है। गृह मंत्री के मुताबिक, आदिवासी क्षेत्रों के विकास में नक्सलवाद, सबसे बड़ी बाधा है। यह संपूर्ण मानवता का दुश्मन होने के साथ ही मानवाधिकारों का सबसे बड़ा हनन करने वाला भी है। आदिवासी इलाकों में 8 करोड़ लोगों को मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखना, मानवाधिकार का सबसे बड़ा हनन है। हजारों निर्दोष आदिवासी, नक्सलियों द्वारा लगाई गई बारूदी सुरंगों से मारे गए हैं।

 

नक्सलवाद, गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं, कनेक्टिविटी, बैंकिंग और डाक सेवाएं आदि नहीं पहुंचने देता। अंतिम व्यक्ति तक विकास को पहुंचाने के लिए नक्सलवाद को समूल नष्ट करना होगा। केन्द्रीय गृह मंत्री कह चुके हैं, कि 2019 से 2024 तक नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में बड़ी सफलता प्राप्त हुई है। सरकार, वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस और सरकारी योजनाओं के शत-प्रतिशत इंप्लीमेंटेशन से एलडब्लूई-प्रभावित क्षेत्रों को पूर्ण विकसित बनाना चाहती है। वामपंथी उग्रवाद से लड़ने के लिए सरकार ने दो रूल आफ लॉ तय किए थे। पहला, नक्सलवाद-प्रभावित क्षेत्रों में कानून का राज स्थापित करना और गैरकानूनी हिंसक गतिविधियों को पूर्णतया बंद करना। दूसरा, लंबे नक्सली आंदोलन के कारण जो क्षेत्र विकास से महरूम रहे, वहां उस क्षति को तेजी से भरना। 


केंद्रीय गृह मंत्री ने एक सुरक्षा बैठक में बताया था कि 30 साल में पहली बार वर्ष 2022 में वामपंथी उग्रवाद के चलते मारे गए नागरिकों की संख्या 100 से कम रही है। शीर्ष नक्सली नेताओं को न्यूट्रलाइज किया गया है। सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का ग्राफ भी ऊपर चढ़ा है। वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ लड़ाई आज अपने अंतिम चरण में है। मार्च, 2026 तक सभी के सहयोग से देश दशकों पुरानी इस समस्या से पूरी तरह मुक्ति पा लेगा। छत्तीसगढ़ में एलडब्लूई की 85 प्रतिशत कॉडर स्ट्रैंथ समाप्त कर दी गई है। अब नक्सलवाद पर एक अंतिम प्रहार करने की जरूरत है। 45 पुलिस स्टेशनों के माध्यम से सुरक्षा वैक्यूम को खत्म कर, राज्य इंटेलीजेंस की शाखाओं को सुदृढ़ करने और राज्यों के विशेषबलों के बहुत अच्छे प्रदर्शन से हमें अपनी रणनीति में सफलता मिली है। हैलीकॉप्टर के प्रावधान से हमारे जवानों की मृत्यु की संख्या में बहुत कमी आई है। 


सुरक्षा संबंधी व्यय योजना में 2004 से 2014 तक 1180 करोड़ रूपए खर्च हुए थे, जिसे मोदी सरकार ने लगभग 3 गुना बढ़ाकर बढ़ाकर 2014 से 2024 के बीच 3,006 करोड़ रूपए कर दिया है। एलडब्लूई के प्रबंधन के लिए केन्द्रीय एजेंसियों को सहायता योजना में 1055 करोड़ रूपए दिए गए। विशेष केन्द्रीय सहायता एक नई योजना है जिसके तहत मोदी सरकार ने पिछले 10 साल में 3590 करोड़ रूपए खर्च किए हैं। अब तक कुल मिलाकर 14367 करोड़ रूपए अनुमोदित किए गए हैं, जिसमें से 12000 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। 


2004 से 2014 के बीच 10 साल में 66 फोर्टीफाइड पुलिस स्टेशन बनाए गए थे, जबकि 2014 से 2024 के मध्य के 10 साल में 544 बनाए गए हैं। 2014 से पहले के 10 साल में 2900 किलोमीटर सड़क नेटवर्क निर्माण हुआ था, जो पिछले 10 साल में बढ़कर 14,400 किलोमीटर हो गया है। 2014 से 2024 तक 6000 मोबाइल टावर लगा दिए गए हैं। इनमें से 3551 टावर को 4G बनाने का काम भी समाप्त हो गया है। 2014 से पहले मात्र 38 एकलव्य मॉडल स्वीकृत हुए थे, अब पिछले 10 साल में 216 स्कूल स्वीकृत हुए हैं। इनमें से 165 एकलव्य मॉडल स्कूल अस्तित्व में आ गए हैं। 
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2004 से 2014 के बीच 10 साल में 16463 हिंसा की घटनाएं हुई थी, जो लगभग 53% की कमी के साथ अब घटकर 7700 तक सीमित रह गई हैं। इसी प्रकार नागरिकों और सुरक्षाबलों की मृत्यु में 70% की कमी हुई है। हिंसा रिपोर्ट करने वाले 96 जिले, अब 57 प्रतिशत की कमी के साथ घटकर 16 रह गए हैं। हिंसा की सूचना देने वाले पुलिस स्टेशन भी 465 में से 171 रह गए हैं, जिनमें से 50 पुलिस स्टेशन नए बने हैं। सुरक्षा वैक्यूम को भरने के लिए 2019 से अब तक 280 नए कैंप बनाए गए हैं। 15 नए जॉइंट टास्क फोर्स बनाए हैं। 


अलग-अलग राज्यों में राज्य पुलिस की सहायता के लिए सीआरपीएफ की 6 बटालियन भेजी हैं। इसके साथ ही एनआईए को भी सक्रिय कर नक्सलियों के वित्तपोषण को रोकने की एक ऑफेंसिव रणनीति अपनाई है। इसके कारण उनके पास आर्थिक संसाधनों की कमी हो गई है। गृह मंत्री ने कहा, कई दिनों तक चलने वाले अनेक ऑपरेशन चलाए गए, जिससे नक्सली घिर जाते हैं और उन्हें भागने का मौका नहीं मिलता है। मोदी सरकार ने फ्लैगशिप योजनाओं के अलावा सड़क कनेक्टिविटी, टेलीकम्युनिकेशन सुविधाओं में सुधार, वित्तीय समावेशन कौशल विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण आदि जैसे महत्वपूर्ण विकास के बिंदुओं पर बहुत बाल देकर काम किया है। इसके अच्छे नतीजे भी मिले हैं। 


वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित जिलों की संख्या में उत्तरोत्तर गिरावट आई है। लगातार बेहतर हो रही स्थिति को देखते हुए, पिछले छह वर्षों में वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिलों की तीन बार समीक्षा की गई है, जिसमें अप्रैल 2018 में 126 से घटकर 90 जिले, जुलाई 2021 में 70 और फिर अप्रैल 2024 में घटकर 38 रह गए हैं। 2010 के उच्च स्तर की तुलना में 2023 में वामपंथी उग्रवाद से संबंधित हिंसा में 73% की कमी आई है। इसी अवधि के दौरान परिणामी मौतों (नागरिकों + सुरक्षा बलों) में भी 86% की कमी आई है। चालू वर्ष में (15.11.2024 तक), 2023 की इसी अवधि की तुलना में वामपंथी उग्रवादी हिंसा की घटनाओं में 25% की और कमी आई है। 


अमित शाह के अनुसार, नक्सलवाद के समूल खात्मे के लिए ज़रूरी है कि फाइनल पुश देकर इस समस्या को हमेशा के लिए खत्म कर दें। उन्होंने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से महीने में एक बार और पुलिस महानिदेशकों से कम से कम 15 दिन में एक बार विकास और नक्सलविरोधी अभियानों का रिव्यू करने को कहा। नक्सलवाद के पूर्ण उन्मूलन की दिशा में काम करना चाहिए। 2026 में जनता की सामूहिक ताकत के ज़रिए देश को ये बताना है कि राज्य सरकारों और केंद्र सरकार ने मिलकर नक्सलवाद की समस्या को पूर्णतया समाप्त कर दिया है। इसके बाद विकास के रास्ते में कोई बाधा नहीं आएगी, कभी भी मानवाधिकार का उल्लंघन नहीं होगा और आईडियोलॉजी के नाम पर हिंसा भी नहीं होगी।
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