पार्टी के वरिष्ठ नेता का कहना है कि हालांकि बिहार में सोशल मीडिया देरी से पहुंचा है, लेकिन पिछले कुछ सालों में व्हाट्सएप और फेसबुक पर बिहार के लोगों की पहुंच में बेहतहाशा बढ़ोतरी हुई है और सोशल मीडिया वॉलेंटियर्स उन्हीं के बीच पहुंच कर सरकार की उपलब्धियां पहुंचाएंगे।
साथ ही, शाह की इस यात्रा में उन बूथों के आंकड़े भी पेश किए जाएंगे, जहां 2015 के बाद पिछले 3 सालों में मुस्लिम और यादव मतदाताओं की संख्या तेजी से बढ़ी है।
सूत्रों ने बताया कि विधानसभा चुनावों में हार के बाद शाह ने भाजपा की बिहार इकाई को आंकड़े एकत्र करने का निर्देश दिया था। इसके अलावा, शाह ने राज्य में बूथ कमेटियों, शक्ति केंद्रों के गठन और मंडलों एवं पन्ना प्रमुखों की नियुक्त के लिए भी कहा था।
दौरे के दौरान शाह पार्टी के उन पदाधिकारियों और प्रमुखों के साथ भी अलग से बैठक करेंगे, जिन्हें उन्होंने फरवरी से राज्य की सभी विधानसभाओं में दौरे करना का निर्देश दिया था। इस दौरे के पश्चात पदाधिकारियों ने एक आंतरिक रिपोर्ट बनाई है, जिसमें प्रत्येक विधानसभा के जातिगत आंकड़ों के साथ वर्तमान विधायकों के कामकाज का लेखाजोखा भी रखा गया है।
सूत्रों का कहना है कि बिहार में मुस्लिम-यादव आबादी लगभग 30 फीसदी है और भाजपा की रणनीति है कि स्थानीय मुद्दों पर वोट देने वाले महादलितों, आर्थिक तौर से पिछड़ों और अन्य समुदायों का समर्थन हासिल करके इनसे मुकाबला किया जाए।