'भारत का संविधान सर्वोच्च, इसके अपमान की इजाजत किसी को नहीं'
हंगामे के दौरान ही पीडीपी सदस्य नजीर अहमद लवाय और मीर मोहम्मद फयाज ने नारे लगाते हुए पोस्टर दिखाए । सभापति ने उनसे ऐसा न करने को कहा। बाहों में काली पट्टी बांधे लवाय और फयाज जब आसन के समक्ष आ कर विरोध जता रहे थे तब उन्होंने विधेयक की प्रतियां फाड़ कर हवा में उछालीं। इस दौरान लवाय ने अपना कुर्ता भी फाड़ लिया। इस पर सभापति ने गहरी नाराजगी जाहिर की। जिसके बाद सभापति ने मार्शल के जरिये उन्हें सदन से बाहर करने का आदेश दिया।
सभापति ने कहा, "भारत का संविधान सर्वोच्च है। इसके अपमान की इजाजत किसी को भी नहीं दी जा सकती। इसे फाड़ने का अधिकार किसी को भी नहीं है।" उन्होंने कहा, "सदन में संविधान की प्रति फाड़ने, भारत के खिलाफ नारे लगाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। मैं न केवल (सदस्यों के) नाम लूंगा बल्कि कार्रवाई भी करूंगा।"
सदन में विपक्ष के नेता और कांग्रेस के वरिष्ठ सदस्य गुलाम नबी आजाद ने कहा कि उनकी पार्टी देश के संविधान का सम्मान करती है, उसकी रक्षा का संकल्प दोहराती है और संविधान की प्रति फाड़े जाने की कड़ी निंदा करती है। आजाद ने कहा कि विपक्षी सदस्य आरक्षण विधेयक के विरोध में नहीं हैं लेकिन वह कश्मीर के हालात पर पहले चर्चा करना चाहते हैं।
"देयर इज नो इमरजेन्सी, ओनल अर्जेन्सी"
एमडीएमके संस्थापक वाइको पहले अपने ही स्थान से विरोध जता रहे थे। बाद में वह आसन के समक्ष आ गए। सभापति ने उनसे कहा कि वह वरिष्ठ सदस्य हैं और उन्हें इस तरह आसन के समक्ष नहीं आना चाहिए। बाद में वाइको ने अपने स्थान से कहा कि सरकार लोकतंत्र को खत्म कर रही है और आपातकाल वाले दिन वापस आ गए हैं।
नायडू ने इस पर कहा, "आपातकाल नहीं बल्कि यह शीघ्रता है।" उन्होंने कहा, "देयर इज नो इमरजेन्सी, ओनल अर्जेन्सी।"
भाजपा ने लोकतंत्र की हत्या की : आजाद
आजाद ने कहा कि अनुच्छेद 370 ऐतिहासिक है जिसके जरिये जम्मू कश्मीर को देश के साथ जोड़ा गया। पिछले 70 साल के दौरान लाखों सुरक्षा कर्मियों और नागरिकों ने अपनी जान गंवाई है।
उन्होंने कहा, "मैं दो या तीन संसद सदस्यों की (संविधान की प्रतियां फाड़ने की) कार्रवाई की कड़ी निंदा करता हूं। इनमें से कोई भी हमारी पार्टी से नहीं था। हम भारत के संविधान का बहुत सम्मान करते हैं और उसके साथ हैं।" आजाद ने हालांकि कहा कि भाजपा ने लोकतंत्र की हत्या की है।
शाह ने कहा कि जम्मू कश्मीर के लोग अनुच्छेद 370 की वजह से गरीबी और भ्रष्टाचार में जीवन यापन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि तीन परिवारों ने वर्षों तक राज्य को लूटा। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर का 27 अक्तूबर 1947 में भारत में विलय किया गया था लेकिन अनुच्छेद 370 जो है, वह 1949 में आया।"
शाह ने कहा, "यह सही नहीं है कि अनुच्छेद 370 की वजह से जम्मू कश्मीर भारत का हिस्सा बना।" उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 हमेशा से ही अस्थायी रहा है और पहले की सरकारों ने राजनीतिक इच्छा शक्ति के अभाव में और वोट बैंक की राजनीति के चलते इसे नहीं हटाया। गृह मंत्री ने कहा, "न तो हम वोट बैंक चाहते हैं और न ही हमारे अंदर राजनीतिक इच्छा शक्ति का अभाव है।"
ऐतिहासिक भूल को सुधार रही है सरकार: जोशी
संसदीय मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि सरकार जम्मू कश्मीर राज्य में अनुच्छेद 370 लागू करने की ऐतिहासिक भूल को सुधार रही है।
कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा, "ऐसे पर्याप्त प्रमाण और उदाहरण हैं जब सरकार ने विधेयक वितरित किए और उसी दिन उन्हें पारित भी किया गया।"
शाह ने कहा कि आरक्षण विधेयक जम्मू कश्मीर के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को सरकारी नौकरियों और शैक्षिक संस्थानों में 10 फीसदी आरक्षण का प्रावधान करेगा। यह आरक्षण अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण के अलावा होगा।
उन्होंने कहा कि पहले भी 38 बार ऐसा हुआ है कि विधेयकों को एक ही दिन वितरित किया गया और उसी दिन पारित किया गया है। "ऐसा आज पहली बार नहीं हो रहा है।"
शाह ने कहा कि अनुच्छेद 370 को समाप्त करने संबंधी संकल्प को मंजूरी मिलने के बाद यह स्वत: ही अमान्य हो जाएगा।