गृहमंत्री अमित शाह ने जनसांख्यिकीय बदलावों की जांच के लिए बनाई गई हाई लेवल कमेटी के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। जस्टिस पीपी नाओलेकर की अगुवाई वाला यह पैनल देश के सीमावर्ती जिलों और बड़े शहरों का दौरा कर अवैध घुसपैठ और अप्राकृतिक जनसंख्या बदलावों का वैज्ञानिक मूल्यांकन करेगा।
गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को जनसांख्यिकीय परिवर्तन पर उच्च स्तरीय समिति की बैठक की। उन्होंने अधिकारियों को अहम दिशानिर्देश दिए। बैठक के बाद जारी बयान के मुताबिक, यह समिति सीमावर्ती जिलों में जनसंख्या संरचना में बदलाव का अध्ययन करेगी। शाह ने समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए अधिकारियों से कहा कि अवैध प्रवासन और अन्य अप्राकृतिक कारणों से हुए परिवर्तनों का आकलन करें। इसके लिए समिति को सीमावर्ती क्षेत्रों, मेट्रो शहरों और औद्योगिक कस्बों का दौरा करना होगा।
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उच्च स्तरीय समिति बनाने का मकसद क्या?
गृह मंत्रालय ने भारत भर में जनसांख्यिकीय परिवर्तनों का आकलन करने के लिए यह उच्च स्तरीय समिति बनाई थी। इसका मकसद अवैध आप्रवासन और अन्य अप्राकृतिक कारणों से उत्पन्न चुनौतियों का समाधान सुझाना है। समिति की अध्यक्षता सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रकाश प्रभाकर नाओलेकर कर रहे हैं। इसमें जनगणना आयुक्त, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी दुर्गा शंकर मिश्रा, पूर्व आईपीएस अधिकारी बालाजी श्रीवास्तव और डॉ. शमिका रवि सदस्य के रूप में शामिल हैं। गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव (विदेशी-1) इस समिति के सदस्य सचिव हैं। मई 2026 में समिति के गठन की घोषणा करते हुए शाह ने इस मुद्दे को गंभीर बताया था। उन्होंने कहा था कि यह देश की संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है। साथ ही कानून व्यवस्था, सामाजिक संरचना में बदलाव और जनजातीय समाज के संरक्षण से भी संबंधित है।
#WATCH | Union Home Minister Amit Shah chaired a meeting of MHA officials to ensure proper facilitation of the High-Level Committee on Demographic Changes. As announced by PM Modi from the Red Fort on 15th Aug 2025, the Committee was formally constituted on 26th May 2026. The… pic.twitter.com/Tf3bv3KgTo
समिति का कार्यक्षेत्र
अमित शाह ने कहा था कि यह समिति अवैध आप्रवासन और अन्य अप्राकृतिक कारणों से होने वाले जनसांख्यिकीय परिवर्तनों का व्यापक आकलन करेगी। यह धार्मिक और सामाजिक समुदायों के स्तर पर असामान्य जनसंख्या बदलावों के पैटर्न का विश्लेषण करेगी। समिति इसके लिए एक नियोजित और समयबद्ध समाधान प्रस्तुत करेगी। एक सरकारी बयान में कहा गया कि उच्च स्तरीय समिति देश के विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे जनसांख्यिकीय परिवर्तनों का वैज्ञानिक मूल्यांकन करेगी। यह उनके कारणों की जांच करेगी और उपयुक्त नीतिगत, विधायी व प्रशासनिक हस्तक्षेप सुझाएगी।
अध्ययन के प्रमुख बिंदु
समिति की शर्तों के अनुसार, यह जनसांख्यिकीय परिवर्तनों से उत्पन्न चुनौतियों पर व्यापक विचार करेगी। इसमें अवैध आप्रवासन से जुड़ी चुनौतियां भी शामिल हैं। यह जनसांख्यिकीय परिवर्तनों के संभावित कारणों का भी अध्ययन करेगी। इनमें सीमा पार गतिविधियां, आर्थिक अवसर और अन्य सामाजिक-पर्यावरणीय कारक शामिल हैं। पैनल इन परिवर्तनों के अंतर्निहित कारकों की पहचान भी करेगा। इनमें अवैध आप्रवासन, असामान्य बसावट पैटर्न और सुनियोजित प्रवासन शामिल हैं।
सिफारिशें और समाधान
समिति धार्मिक या सामाजिक समुदायों के स्तर पर संरचनात्मक जनसंख्या परिवर्तनों का विश्लेषण करेगी। विशेष रूप से उन परिवर्तनों का जो व्यापक रुझानों से अलग हैं। बयान में कहा गया कि समिति एक सुव्यवस्थित और स्थायी परिचालन तंत्र की सिफारिश करेगी। यह देश में पहले से रह रहे अवैध आप्रवासियों की कानूनी, निष्पक्ष और समयबद्ध पहचान के लिए होगा। इसमें उनकी हिरासत और निर्वासन की प्रक्रिया भी शामिल होगी।