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Amit Shah: 'जब भी सदन की गरिमा से समझौता हुआ, इसके भयंकर परिणाम देखने पड़े', सभापति सम्मेलन में बोले शाह

Sun, 24 Aug 2025 03:09 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा 'हमें जनता के मुद्दों को उठाने के लिए एक निष्पक्ष मंच प्रदान करने के लिए काम करना चाहिए। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि सदन का संचालन नियमों के अनुसार हो।'
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अमित शाह और दिल्ली की सीएम - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि संसद या विधानसभाएं बहस और चर्चा की जगह हैं, लेकिन संकीर्ण राजनीतिक लाभ के लिए सदन को चलने न देना ठीक नहीं है। शाह ने अखिल भारतीय सभापति सम्मेलन को संबोधित करते हुए ये बात कही। संसद का मानसून सत्र विपक्ष के विरोध के चलते बार-बार बाधित हुआ और सत्र के दौरान काफी कम काम हुआ। गृह मंत्री ने यह भी कहा कि जब संसद में सीमित बहस या चर्चा होती है, तो इससे राष्ट्र निर्माण में सदन का योगदान प्रभावित होता है।
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'संकीर्ण राजनीतिक फायदे के लिए सदन न चलने देना ठीक नहीं'
अमित शाह ने कहा 'लोकतंत्र में बहस होनी ही चाहिए। लेकिन किसी के संकीर्ण राजनीतिक लाभ के लिए, विपक्ष के नाम पर सदन को चलने न देना ठीक नहीं है। विपक्ष को हमेशा संयमित रहना चाहिए। देश को इस पर विचार करना होगा, जनता को इस पर विचार करना होगा और निर्वाचित प्रतिनिधियों को इस पर विचार करना होगा।' शाह ने कहा कि सभी चर्चाओं में सार्थकता होनी चाहिए और सभी को अध्यक्ष पद की गरिमा और सम्मान बढ़ाने की दिशा में काम करना चाहिए।

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा 'हमें जनता के मुद्दों को उठाने के लिए एक निष्पक्ष मंच प्रदान करने के लिए काम करना चाहिए। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि सदन का संचालन नियमों के अनुसार हो।' हस्तिनापुर में द्रौपदी के अपमान का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि 'जब भी सदन की गरिमा से समझौता हुआ है, देश को इसके भयंकर परिणाम देखने को मिले हैं।'
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गृह मंत्री ने विट्ठलभाई पटेल को किया याद
गृह मंत्री ने आजादी के बाद से भारत की लोकतांत्रिक परंपरा की सराहना की और कहा कि 'यहां लोकतंत्र की जड़ें इतनी गहरी हैं कि सत्ता परिवर्तन के दौरान खून की एक बूंद भी नहीं गिरी है, जबकि कई देशों में लोकतांत्रिक स्थिति लगातार बिगड़ रही है।' शाह ने संसद के पहले निर्वाचित भारतीय अध्यक्ष विट्ठलभाई पटेल को भी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि '100 साल पहले आज ही के दिन, महान स्वतंत्रता सेनानी विट्ठलभाई पटेल को लोकसभा का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था, जिससे भारत के विधायी इतिहास की शुरुआत हुई।' शाह ने कहा कि 'अगर देश को आजादी दिलाना अहम था तो लोकतंत्र की स्थापना और विधायी प्रक्रियाओं की स्थापना भी उतनी ही महत्वपूर्ण काम है।' विट्ठलभाई पटेल ने कठिन समय में भी लोकतंत्र की स्थापना और उसे मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हम सभी को यह बात याद रखनी चाहिए।'

विट्ठलभाई पटेल को बताया भीष्म पितामह
दिल्ली विधानसभा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान विट्ठलभाई पटेल की बात करते हुए उन्होंने ये भी कहा कि भारत की विधायी परंपराओं के भीष्म पितामह माने जाने वाले विट्ठलभाई पटेल ने लोकतंत्र की मजबूत नींव रखी। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से आग्रह किया कि सदन में दिए गए महानुभावों के भाषणों का संकलन देश की सभी विधानसभाओं की लाइब्रेरी में उपलब्ध कराया जाए, ताकि युवा और विधायकों को स्वतंत्रता संग्राम और लोकतांत्रिक परंपराओं की समझ हो।

शाह ने कहा कि विट्ठलभाई पटेल ने विधानसभा अध्यक्ष रहते हुए अंग्रेजी हुकूमत की कठोर मानसिकता को विधानसभा की कार्यप्रणाली पर हावी नहीं होने दिया। उनके समय में ही राज्यों और केन्द्र में विधायी विभागों और विधानसभा सचिवालय की स्थापना हुई। उन्होंने विधानसभा की स्वतंत्रता पर जोर देते हुए कहा था कि कोई भी विधानसभा चुनी हुई सरकार के अधीन नहीं हो सकती।
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सभापति की भूमिका पर कही ये बात
गृह मंत्री ने सभापति की भूमिका को सबसे कठिन बताते हुए कहा कि वे दलगत सीमाओं से ऊपर उठकर निष्पक्ष अम्पायर की तरह कार्य करते हैं। निष्पक्षता और न्याय ही अध्यक्ष की गरिमा के आधार स्तंभ हैं। शाह ने कहा कि आजादी के बाद भारत में सत्ता हस्तांतरण हमेशा शांतिपूर्ण हुआ, क्योंकि हमारी विधायी प्रक्रिया मजबूत और परंपराओं पर आधारित है। उन्होंने कहा कि विधानसभाओं में किसानों से लेकर युवाओं, महिलाओं, पिछड़े वर्गों, राष्ट्रीय सुरक्षा और विकास तक के मुद्दों पर चर्चा होती रही है। विधानसभाओं का मूल उद्देश्य जनकल्याण होना चाहिए और हर कानून का लक्ष्य सर्वस्पर्शी और सर्वसमावेशी विकास पर केंद्रित होना चाहिए।

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