कारोबारी गौतम अदाणी के समूह ने अपने नकदी भंडार और मुनाफे का खुलासा करते हुए दावा किया कि यह रकम ऋण दायित्वों के साथ-साथ समूह की विकास योजनाओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। समूह ने निवेशकों को आश्वस्त किया कि संस्थापक के खिलाफ अमेरिकी रिश्वतखोरी के अभियोग के बावजूद कारोबार सामान्य रूप से चल रहा है।
निवेशकों के समक्ष प्रस्तुति में समूह ने बताया कि उसके पास वर्तमान में 55,024 करोड़ रुपये की नकदी शेष है। यह अगले 28 महीनों के लिए दीर्घकालिक ऋण चुकाने के लिए आवश्यक रकम से अधिक है। इसके अलावा अब कुल परिसंपत्ति सृजन में इक्विटी का योगदान लगभग दो-तिहाई है, जो पांच वर्ष पहले की तुलना में एकदम विपरीत है। पिछले छह महीनों में समूह ने करीब 75,227 करोड़ रुपये का निवेश किया, जबकि कुल कर्ज में केवल 16,882 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई।
क्लीनचिट के बाद ही अदाणी समूह में नया निवेश करेगी टोटल एनर्जी
अदाणी के कारोबारी समूह के बड़े विदेशी निवेशकों में से एक फ्रांस की ऊर्जा दिग्गज टोटल एनर्जीज एसई ने कहा है कि अमेरिकी रिश्वतखोरी मामले में जब तक क्लीनचिट नहीं मिल जाती वह अदाणी समूह में कोई नया निवेश नहीं करेगी।
जीक्यूजी पार्टनर्स ने अदाणी पर जताया भरोसा
बुटीक निवेश फर्म जीक्यूजी पार्टनर्स ने अदाणी समूह की कंपनियोंं पर अपना भरोसा दोहराया है। जीक्यूजी ने कहा, अभियोग कर्मचारियों पर है, न कि कंपनी पर। हम व्यक्तियों और कंपनियों के आरोपों में अंतर को समझते हैं।
अदाणी से 100 करोड़ का दान नहीं लेगी तेलंगाना सरकार
तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी ने कहा कि राज्य सरकार राज्य में स्थापित किए जा रहे यंग इंडिया स्किल यूनिवर्सिटी के लिए अदाणी समूह का 100 करोड़ का दान स्वीकार नहीं करेगी। समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने इस दान की घोषणा की थी। रेड्डी ने कहा कि यह निर्णय इसलिए लिया गया क्योंकि अदाणी की घोषणा के बाद गैरजरूरी चर्चा ने तूल पकड़ी कि यदि दान स्वीकार कर लिया गया तो यह राज्य सरकार या मुख्यमंत्री के पक्ष में प्रतीत हो सकता है।
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उनकी सरकार ने अदाणी समेत किसी भी कंपनी से एक रुपया तक अपने खाते में नहीं लिया है। रेड्डी ने कहा, मैं और मेरे कैबिनेट सहयोगी ऐसी अनावश्यक चर्चाओं में शामिल नहीं होना चाहते हैं, जिससे राज्य सरकार या मेरी छवि को नुकसान पहुंचे। इसीलिए राज्य सरकार की ओर से हमारे अधिकारी जयेश रंजन ने (अदाणी को) एक पत्र लिखा है। जिसमें अदाणी फाउंडेशन से साफ साफ कहा गया कि यूनिवर्सिटी के लिए कोई रकम देने की जरूरत नहीं है।
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