अमेरिका ने एक बार फिर परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में भारत के जल्द प्रवेश का समर्थन करते रहने की बात दोहराई। टू प्लस टू वार्ता के दौरान अमेरिका ने हरियाणा स्थित ग्लोबल सेंटर फॉर न्यूक्लियर एनर्जी पार्टनरशिप (जीसीएनईपी) के सहयोग वाले एमओयू की अवधि भी बढ़ा दी है।
बैठक के बाद जारी साझा बयान में कहा गया कि दोनों देश सामरिक ऊर्जा साझेदारी ओर कारोबारी माहौल में सुधार के लिए प्रयासरत हैं।
संयुक्त बयान में दोनों पक्षों ने भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते का जिक्र करते हुए आंध्र प्रदेश के कोवाड़ा में छह परमाणु रिएक्टरों के निर्माण के लिए न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआईएल) और वेस्टिंगहाउस इलेक्ट्रिक कंपनी (डब्ल्यूईसी) के बीच परियोजना शुरू होने की पहल का भी स्वागत किया।
दोनों देशों ने 2008 में भारत-अमेरिका परमाणु सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते के तहत भारत के लिए यूरेनियम की आपूर्ति आसान हुई थी और विदेशी कंपनियों (अमेरिका और फ्रांस) के लिए भारत में परमाणु ऊर्जा रिएक्टर बनाने का मार्ग प्रशस्त हुआ था।
दोनों पक्षों ने अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि और भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा बाजार पहुंच में सुधार, व्यापार के लिए बाधाओं को दूर करने और व्यापार के माहौल में सुधार पर एक समझ हासिल करने के लिए चल रही चर्चाओं का उल्लेख किया।
साथ ही सामरिक ऊर्जा साझेदारी (एसईपी) के चार स्तंभों तेल और गैस, बिजली व ऊर्जा दक्षता, नवीकरणीय ऊर्जा एवं सतत वृद्धि के लिए किए गए महत्वपूर्ण कदमों पर संतुष्टि जताई। इसके अलावा भारत अमेरिकी गैस टास्क फोर्स के तहत की गई प्रगति और उद्योग के नेतृत्व वाली परियोजनाओं की शुरुआत की भी सराहना की गई।
हिंद-प्रशांत में मुक्त व समावेशी कारोबार पर जोर
वार्ता के दौरान दोनों पक्षों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में मुक्त, खुला, समावेशी, शांतिपूर्ण और समृद्ध कारोबारी माहौल कायम करने की प्रतिबद्धता दोहराई। इस क्षेत्र में सभी हित धारकों के आर्थिक और सुरक्षा हितों को सुरक्षित रखने पर भी जोर दिया गया। मंत्रियों ने समान विचारधारा वाले देशों की इस क्षेत्र को लेकर बढ़ती समझ का स्वागत किया।