सीडीएस अनिल चौहान के बयान का अंश
- फोटो : अमर उजाला
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वैश्विक अस्थिरता के पीछे अमेरिका की भूमिका
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने अमेरिका की भूमिका को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि इस वक्त पूरी दुनिया दो वैश्विक व्यवस्थाओं के बीच बदलाव के दौर से गुजर रही है। ऐसे समय में अमेरिका की नीतियां इस अस्थिरता में मुश्किलों की एक और परत जोड़ रही है, जिससे हालात और कठिन हो रहे हैं। जनरल चौहान का यह बयान भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक समीकरणों की दिशा में एक अहम संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
जनरल चौहान ने कहा कि मौजूदा समय में दुनिया एक पुरानी वैश्विक व्यवस्था से नई व्यवस्था की ओर बढ़ रही है। इस संक्रमण काल में अमेरिका की स्थिति और उसकी रणनीतिक नीति विश्व स्तर पर एक अतिरिक्त जटिलता पैदा कर रही है। यह स्थिति भारत जैसे देशों के लिए अधिक सतर्कता और रणनीतिक तैयारी की मांग करती है, ताकि बदलते समीकरणों का प्रभाव हमारी सुरक्षा पर न पड़े।
सीडीएस अनिल चौहान के बयान का अंश
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आर्थिक और व्यापारिक सुरक्षा भी राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा
उन्होंने यह भी कहा कि अब केवल सैन्य ताकत ही नहीं, बल्कि आर्थिक और व्यापारिक सुरक्षा भी किसी देश की कुल सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा बन चुकी है। एक मजबूत और लचीली अर्थव्यवस्था ही राष्ट्रीय शक्ति की बुनियाद होती है, जिससे टिकाऊ विकास और सामाजिक स्थिरता सुनिश्चित होती है। भारत के लिए यह जरूरी है कि वह अपनी आर्थिक संरचना को सुरक्षित और स्वावलंबी बनाए रखे।
भारत जैसे विविधतापूर्ण देश के लिए आंतरिक सुरक्षा अहम
जनरल चौहान ने कहा कि भारत जैसा देश, जो कई भाषाओं, जातियों और धर्मों का संगम है, उसके लिए आंतरिक और सामाजिक सुरक्षा बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि सामाजिक एकता और आपसी विश्वास को बनाए रखने के लिए ऐसी आंतरिक सुरक्षा नीति की ज़रूरत है, जो सभी समुदायों को एक सूत्र में बांधे। यह सामाजिक स्थायित्व भारत की सुरक्षा की मजबूती का आधार बनेगा।
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भारतीय उपमहाद्वीप में चीन-पाकिस्तान समीकरण से खतरे
जनरल चौहान ने दक्षिण एशिया में बार-बार बदलती सरकारों और उनके साथ आने वाली वैचारिक अस्थिरता को भी सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र में आर्थिक संकट से जूझते देशों में बाहरी ताकतें 'कर्ज कूटनीति' के ज़रिए अपनी पकड़ मजबूत कर रही हैं। इसके साथ ही चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच संभावित रणनीतिक तालमेल क्षेत्रीय स्थिरता के लिए चिंता का विषय बन सकता है।
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सीडीएस और नौसेना प्रमुख की मुलाकात
भारत दौरे पर आए यूएई नेवी के कमांडर मेजर जनरल हुमैद मोहम्मद अब्दुल्ला अलरमीथी ने 8 जुलाई को नई दिल्ली में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान और नौसेना प्रमुख एडमिरल डी.के. त्रिपाठी से मुलाकात की। इस दौरान हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सहयोग बढ़ाने, साझा प्रशिक्षण और रक्षा साझेदारी को मजबूत करने पर चर्चा हुई। उन्होंने नेशनल वॉर मेमोरियल पर शहीदों को श्रद्धांजलि भी दी। यह दौरा भारत-यूएई के बीच नौसैनिक संबंधों को गहराई देने और क्षेत्रीय सुरक्षा में साझा प्रयासों को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
शिपिंग में निवेश के लिए भारत बना नई उम्मीद
लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग में आयोजित 'इंडिया मरीन टाइम इंवेस्टमेंट मीट' में भारत ने ब्रिटेन के निवेशकों को पोर्ट्स और शिपिंग सेक्टर में बड़े अवसरों की झलक दिखाई। भारत सरकार के सचिव टी.के. रामचंद्रन ने प्रधानमंत्री मोदी के "मेरीटाइम अमृत काल" विज़न को सामने रखते हुए बताया कि भारत अगले 20 वर्षों में इस क्षेत्र में एक ट्रिलियन डॉलर का निवेश चाहता है। उन्होंने 100% एफडीआई की सुविधा, पोर्ट्स की दक्षता और ग्लोबल रैंकिंग में सुधार जैसे फैक्ट्स के जरिए भारत को "ग्रीन मेरीटाइम ग्रोथ" का अगला गंतव्य बताया।