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H-1B वीजा मामले पर बोला US- भारतीयों कंपनियों की वजह से मिलती है हजारों अमेरिकियों को नौकरी

Tue, 25 Apr 2017 03:27 PM IST
amarujala.com- presented by: नंदलाल शर्मा
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डोनाल्ड ट्रंप - फोटो : फाइल फोटो
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अमेरिकी समकक्ष स्टीवन मुचीन के साथ बातचीत में वित्तमंत्री अरुण जेटली द्वारा एच वन बी वीजा पर लगी पाबंदियों के उठाए जाने पर अमेरिका ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। ट्रंप प्रशासन ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था में भारतीय कंपनियों के योगदान को सराहते हुए भारत-अमेरिका के बीच मजबूत संबंधों की वकालत की है। 
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अमेरिकी गृह विभाग के कार्यकारी प्रवक्ता मार्क टोनर ने सोमवार को डेली न्यूज कॉन्फ्रेंस में कहा, 'हम भारत और अमेरिका के बिजनेस टू बिजनेस संबंधों को और मजबूत बनाना चाहते हैं।'

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टोनर ने एक सवाल के जवाब में यह बात कही, जब उनसे एच वन बी वीजा मुद्दे पर ट्रंप प्रशासन द्वारा की जा रही समीक्षा के सिलसिले में सवाल किए गए। सख्त किए जा रहे एच वन बी वीजा के नियमों का भारतीय आईटी कंपनियों पर काफी प्रभाव पड़ने की आशंका है। भारतीय आईटी कंपनियां इस पर काफी निर्भर हैं। 
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टोनर ने कहा, 'अमेरिकी अर्थव्यवस्था में लगातार निवेश कर रही भारतीय कंपनियां हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। इनकी वजह से हजारों लोगों को रोजगार मिलता है।'

उन्होंने कहा, 'वीजा पर किसी भी नए बदलाव के संदर्भ में मुझे चेक करना होगा कि यह अपडेट हुआ है या नहीं। अमेरिका वीजा इंटरव्यू और एडमिशन प्रक्रिया को और सख्त बनाने के लिए नए तरीकों पर विचार कर रहा है।'

वीजा समीक्षा प्रक्रिया पर टोनर ने कहा, 'यह याद रखना बहुत महत्वपूर्ण है कि हमारे काउंसलर ब्यूरो और विदेशों में स्थित काउंसलर ऑफिस, उच्चायोग, मिशन कैसे काम करते हैं। हम हमेशा इन प्रक्रियाओं की समीक्षा करते हैं ताकि अमेरिका की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

अमेरिकी दौरे पर वित्तमंत्री अरुण जेटली ने रविवार को एच वन बी वीजा का मामला मुचीन के सामने उठाया और इस बात की आशंका जताई कि इस पर पाबंदी के चलते अमेरिका आने वाले भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स पर काफी असर हो सकता है। 

गौरतलब है कि एच वन बी वीजा का मामला चर्चाओं में तब आया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एच वन बी वीजा प्रोग्राम को सख्त बनाने के लिए एक्जीक्यूटिव ऑर्डर पर हस्ताक्षर किए। अमेरिकी प्रशासन की कोशिश एच वन बी वीजा के दुरुपयोग को रोकने और मोस्ट स्किल्ड या ज्यादा वेतन पाने वाले प्रोफेशनल्स को दिया जाना सुनिश्चित करना है। ट्रंप प्रशासन के इस निर्णय से भारत की 150 बिलियन डॉलर की आईटी इंडस्ट्री पर गहरा असर पड़ने की आशंका है। 
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