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पाक पर अविश्वास के चलते अमेरिका ने साझा नहीं किया था लादेन का ठिकाना

Sat, 03 Oct 2020 02:36 AM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सांकेतिक तस्वीर
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कुख्यात आतंकवादी ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान में घुसकर मारने के मामले में अमेरिका के पूर्व रक्षा मंत्री और पूर्व सीआईए प्रमुख लियोन पनेटा ने पाकिस्तानी भरोसे पर जबरदस्त संदेह जताया है।

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उन्होंने कहा कि अमेरिका में भरोसे की कमी के कारण ही ओसामा बिन लादेन के स्थान के बारे में पाकिस्तान को सूचित नहीं किया। उन्होंने कहा पाक लगातार हमारा भरोसा तोड़ता रहा है। 

अमेरिकी खुफिया एजेंसी के प्रमुख रह चुके पूर्व रक्षा मंत्री ने यह तक कहा कि पाकिस्तान को लादेन की जानकारी न देने के पीछे हमारे पास कई पुराने ऐसे अनुभव थे, जिसमें हमने उसे आतंकियों के बारे में बताया, लेकिन उसने हमारा भरोसा तोड़ा।
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पनेटा ने एक टीवी को दिए इंटरव्यू में कहा, मुझे यह विश्वास करना मुश्किल लगता है कि पाक में कोई ऐसा नहीं था जो ओसामा बिन लादेन के एबटाबाद परिसर के बारे में नहीं जानता हो।

उन्होंने बताया कि हम चिंतित थे कि यदि हमने पाक से एबटाबाद में ओसामा के होने की सूचना साझा की तब या तो लादेन का स्थान बदल दिया जाता अथवा उसे कड़ी सुरक्षा में गायब कर दिया जाता। बता दें कि अल-कायदा प्रमुख लादेन को 2 मई, 2011 को पाकिस्तान में उसके एबटाबाद परिसर में अमेरिकी नौसेना सील टीम ने गुप्त ऑपरेशन में मार दिया गया था।

ओबामा ने माना था, पाक ने भरोसा तोड़ा
लियोन पनेटा ने कहा कि एक बार जब अमेरिका को ओसामा का एबटाबाद कंपाउंड मिल गया, तब हमने सोचा कि क्या पाक से यह सूचना साझा की जाए। ऐसे में तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा कहा, पहले के अनुभव बताते हैं कि हर बार अमेरिका का भरोसा टूटा है। इसके अलावा वह ऐसी जगह पर मौजूद है जहां पाकिस्तानी वेस्ट पाइंट भी है। इसलिए ओसामा के खिलाफ सीधा ऑपरेशन चलाने का फैसला लिया गया। 

पाक में फरार अपराधियों के भाषण प्रसारण पर रोक
पाकिस्तान में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया निगरानी दल (पीईएमआरए) ने टीवी या रेडियो पर ऐसे किसी भी भाषण, इंटरव्यू अथवा सार्वजनिक संबोधन पर प्रतिबंध लगा दिया है जो निवासित या फरार अपराधियों द्वारा दिए जा रहे हों।

ये प्रतिबंध हाल ही में पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के लंदन से सेना को निशाना बनाते भाषणों के मद्देनजर लगाए गए हैं। अपने ताजा भाषण में शरीफ ने कहा था कि सेना ने धांधली करके 2018 के चुनाव में उन्हें हराया था। बता दें कि देश में विपक्षी पार्टियों के गठबंधन से डरकर भी पाकिस्तान में इस तरह के कदम उठाए जा रहे हैं। 

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