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- फोटो : Vani (twitter)
गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) पर शिकंजा कसने की कोशिश में लगी और विदेशी अंशदान नियमन कानून (एफसीआरए) में संशोधन के लिए पेश बिल को लेकर तमाम गैर सरकारी संगठनों ने विरोध जताया है। वॉलेंटरी एक्शन नेटवर्क इंडिया (वानी) ने इसे देश भर में विकास, राहत, वैज्ञानिक शोध और जनसेवा जैसे कामकाज में लगे एनजीओ को खत्म करने वाला कदम बताते हुए कहा कि इस बिल से एनजीओ समुदाय के लिए काम करना मुश्किल हो जाएगा।
वानी ने कहा है कि ऐसे वक्त में जब देश एक भयानक जानलेवा महामारी से जूझ रहा है औऱ इससे बचने और राहत पहुंचाने के लिए विदेशी मदद को प्रोत्साहित करने की जरूरत है, एनजीओ के नियम कानूनों और सर्फिकेट प्रक्रिया में ऐसे बदलाव बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण हैं। नया एफआरसीए बिल कोरोना और लॉकडाउन के दौरान बेहद अहम भूमिका निभाने वाले तमाम एनजीओ को काम करने से रोकने और उनकी मुश्किलें बढ़ाने वाला है।
वानी ने एक बयान जारी करके कहा है कि इस बिल से ये साबित करने की कोशिश की जा रही है कि विदेश से ग्रांट लेने वाले सभी एनजीओ बेईमान और गलत हैं। इस बिल के बाद पूछताछ और जांच के नाम पर एनजीओ के कामकाज को रोकने और किसी और के साथ सहयोग न लेने को मजबूर करने की कोशिश होगी, जिससे समाज की बेहतरी से जुड़े काम न हो सकें। इस बिल के जरिये न केवल विदेशी ग्रांट बल्कि अपने देश के उन एनजीओ के साथ तालमेल करने के अधिकारों में भी कटौती की जा रही है जो एफसीआरए के नियमों के तहत काम करती हैं।
वानी ने कहा है कि वह सरकार की इस पहल का इस मायने में समर्थन करती है कि वह एनजीओ के नाम पर दुकानें चलाने वालों और केवल ग्रांट के लिए फर्जी एनजीओ पर लगाम कसने की कोशिश कर रही है। ये होना बहुत जरूरी है। लेकिन इसके नाम पर जो लोग ईमानदारी से काम कर रहे हैं और सचमुच समाजसेवा के काम में लगे हैं, उनके काम को रोकना और पाबंदी लगाना गलत है।