त्रिपुरा के वरिष्ठ मंत्री रतन लाल नाथ ने बताया कि इन लोगों ने एक एंबुलेंस किराये पर ली और ड्राइवर उन्हें लेकर करीब 3200 किलोमीटर का सफर तय कर 27 अप्रैल को उदयपुर पहुंचा था। रतनलाल ने सचिवालय में कहा कि इन लोगों की असम-त्रिपुरा सीमा पर चूराबारी में स्क्रीनिंग की गई थी और कोई लक्षण न दिखने पर राज्य में प्रवेश की अनुमति दे दी गई थी।
उन्होंने कहा, ड्राइवर और पांचों यात्रियों के सैंपल जांच हेतु लिए गए थे। इसमें बाकी पांचों लोगों की रिपोर्ट निगेटिव आई है लेकिन ड्राइवर की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है, वह तमिलनाडु का रहने वाला है। उन्होंने बताया कि गुरुवार की सुबह ड्राइवर के पश्चिम बंगाल के सिलिगुड़ी में होने का पता चला है। बाकी पांचों लोगों को क्वारंटीन में रखा गया है।
उन्होंने कहा, हालांकि, बाकी पांचों लोगों की रिपोर्ट निगेटिव आई है लेकिन पुष्टि के लिए सभी के सैंपल दोबारा जांच के लिए भेजे जाएंगे। उनका क्वारंटीन काल अभी समाप्त नहीं हुआ है, इसलिए हम उनकी दोबारा जांच कर सकते हैं। लक्षण न दिखने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति कोरोना से संक्रमित नहीं है।
मंत्री ने कहा कि त्रिपुरा के करीब 40 हजार लोग देश के विभिन्न राज्यों में फंसे हुए हैं, लेकिन अभी तक केवल 6000 लोगों ने घर लौटने के लिए राज्य हेल्पलाइन पर संपर्क कर खुद को पंजीकृत किया है। सभी को वापस लाना एक कठिन कार्य है और उन्हें राज्य में प्रवेश की अनुमति देने में भी बड़ा खतरा है। हमारी सरकार फंसे लोगों को हर संभव सहायता उपलब्ध करा रही है।
उन्होंने लोगों से न घबराने की अपील करते हुए कहा कि राज्य सरकार जल्द ही रैपिड टेस्टिंग शुरू करेगी। उन्होंने लोगों से अनुरोध किया कि अगर किसी को कोरोना के लक्षण दिखते या महसूस होते हैं तो वह इसे छिपाए नहीं और अधिकारियों को इस बात की जानकारी दे।