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उत्तराखंड उदय संवाद 2018: एजुकेशन में कुछ सुधार हुआ, बहुत कुछ होना बाकी

Sun, 07 Jan 2018 06:33 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला नई दिल्ली
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- फोटो : Source
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उत्तराखंड के गठन के समय यहां की जनता और राजनीतिक दलों ने जो बड़े सपने पाले थे उनमें से एक था राज्य का शिक्षा के क्षेत्र में मजबूत होना, जिससे इस पहाड़ी राज्य के दूर सुदूर में बैठे लोगों तक भी शिक्षा की रोशनी पहुंच सके। लेकिन गठन के लगभग 17 साल होने के बाद भी शिक्षा के क्षेत्र में राज्य आज भी आत्मनिर्भर नहीं हो सका है, खासकर उच्च शिक्षा के क्षेत्र में गाड़ी आज भी पुरानी जगह अटकी हुई है।
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दशकों पुराने रुड़की आईआईटी और देहरादून स्थित फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट को छोड़ दिया जाए तो पिछले 17 सालों में राज्य के हिस्से में मात्र काशीपुर में आईआईएम और श्रीनगर एनआईटी ही आया है। नतीजतन राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्‍था आज भी अधिकतर प्राइवेट इंजीनियरिंग कालेजों और विश्वविद्यालयों के भरोसे ही है। इसी कारण पहाड़ की मेधाओं को उच्च शिक्षा के लिए दिल्‍ली और नजदीकी उत्तर प्रदेश के संस्‍थानों का रुख करना पड़ता है। इस कसक को राज्य के बाशिंदे भी बड़ी शिद्दत से महसूस करते हैं। 

वहीं अगर स्कूली शिक्षा की बात करें तो इस मामले में राज्य पहले से ही कुछ बेहतर स्थिति में है। देहरादून का दून स्कूल, वेलहम गर्ल्स स्कूल देहरादून, मसूरी का वुड स्टॉक स्कूल, नैनीताल का शेरवुड और बिरला विद्या मंदिर स्कूल शुरू से ही उत्तराखंड की शान रहे हैं, देश के तमाम हिस्सों से बच्चे बेहतर स्कूली शिक्षा के लिए पहाड़ का रुख करते हैं। लेकिन ये सिक्के का एक पहलू है जो शिक्षा में निजी क्षेत्र की भागीदारी को सामने रखता है अगर सरकारी व्यवस्‍था की बात करें तो वो बहुत बेहतर स्थिति में नहीं हैं।
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अलग राज्य का दर्जा पाने के बाद भी प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर सरकारी स्‍कूल कालेजों का हाल किसी से छिपा नहीं है। खुद आंकड़े भी इसकी गवाही देते हैं कि मौजूदा दौर में शिक्षा के मामले में उत्तराखंड को लंबी दूरी तय करनी बाकी है। उत्तराखंड की स्‍थापना के तुरंत बाद साल 2001 में हुई जनगणना में राज्य की साक्षरता दर 71.60 फीसदी थी जो दस साल बाद 2011 में हुई जनगणना में मात्र 78.8 फीसदी तक पहुंच सकी, यानि दस साल में साक्षरता दर में मात्र 7.2 फीसदी की वृद्िध हुई है।

इसमें भी बड़ा योगदान महिलाओं का है, जिनकी साक्षरता दर 59.6 से 70.0 फीसदी तक पहुंच गई लेकिन पुरुष साक्षरता मात्र चार फीसदी की वृद्िध के साथ 83.3 से 87.4 फीसदी तक ही पहुंच सकी। साफ है कि शिक्षा के मामले में राज्य और उसके हुक्मरानों को अभी काफी प्रयास करने होंगे जिससे शिक्षा का स्तर सुधर सके।

इसी कड़ी में अमर उजाला का संवाद कार्यक्रम सरकार तक जनता की आवाज पहुंचाने का एक बड़ा मंच बन सकता है। 8 जनवरी को राजधानी देहरादून में होने वाले 'अमर उजाला संवाद उत्तराखंड उदय 2018' कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों की दिग्‍गज हस्तियां शामिल होकर आम जनता और उनसे जुड़े सवालों से रूबरू होंगी। इसी मंच पर शिक्षा जगत की कुछ बड़ी हस्तियां भी होंगी और राज्य के मुख्यमंत्री भी। नितिन गड़करी के रूप में केंद्र की नुंमाइदंगी भी होगी और विभिन्न क्षेत्र की दिग्‍गज हस्तियां भीं शामिल रहेंगी। ऐसे में जनता की आवाज को बेहतर मंच मिलेगा और सवालों को जवाब भी। 
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हमारे पाठक भी इस संवाद का हिस्सा बन सकेंगे। #AmarUjalaSamwad के जरिए वे अपने सवालों को ट्विटर के माध्यम से उत्तराखंड उदय संवाद में उपस्थित गणमान्य अतिथियों से पूछ सकेंगे। उत्तरखंड उदय संवाद के जरिये यह जानने की कोशिश की जाएगी कि आखिर किन खूबियों के चलते उत्तराखंड जल्द ही निवेशकों का पसंदीदा राज्य बन जाएगा। यदि आपके मन में भी उत्तराखंड उदय में आने वाले अतिथियों के लिए कोई सवाल है तो 08067360111 नंबर पर मिस्ड कॉल दे सकते हैं। सबसे बेहतर सवाल पूछने वाले पाठक को आयोजन में आमंत्रित किया जाएगा।

अमर उजाला उत्तराखंड उदय संवाद 2018 के प्रस्तुतकर्ता हैं पैसिफिक। स्मार्टफोन पार्टनर हैं कोमियो। सोशल मीडिया पार्टनर है फेसबुक। टीवी पार्टनर समाचार प्लस उत्तरप्रदेश/उत्तराखंड न्यूज चैनल है। उत्‍तराखंड शासन, पासपास पल्स, मदर्स प्राइड, मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण, आदित्य बिरला टैनफैक, ब्रिडकुल, अमरउजाला डॉट कॉम, फिरकी डॉट इन, माय रिजल्ट प्लस, अमर उजाला काव्य और अमर उजाला टीवी इस आयोजन के एसोसिएट पार्टनर्स हैं। टूव्हीलर पार्टनर हैं यूएम।
आउटडोर पार्टनर हैं AUTDoors.
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