हमारा समाज तरह-तरह की कुरीतियों, ढोंग, पाखंड और अंधविश्वास से घिरा हुआ है। कभी समाज में जात-पात को लेकर विवाद होता है तो कभी इंटरकास्ट मैरिज तो कभी महिलाओं को मासिक धर्म को लेकर समाजिक कुरीतियों और पाखंड से घेरा जाता रहा है। ऐसा नहीं है कि इन कुरीतियों में कोई विशेष जाति या धर्म के लोग जुड़े हों बल्कि पूरा का पूरा समाज इससे ग्रसित दिखाई देता है।
धर्म और आस्था को लेकर आज के पढ़े-लिखे लोग तक इसके शिकार होते देखे गए हैं। चमत्कारी बाबाओं और भगवानों द्वारा महिलाओं के शोषण की बातें हमेशा से प्रकाश में आती रही हैं और धन तो इनके पास दान का इतना आता है कि जिसे यह खुद भी नहीं गिन पाते हैं। एक ढ़ोंगी बाबा को भगवान बना देने के लिए सिर्फ कोई बाबा, मुल्ला या भगवान नहीं बल्कि हमारा पूरा समाज भटका हुआ है। लेकिन अब ऐसा माना जाने लगा है कि हमारी युवा पीढ़ी समाज की कुरीतियों को खत्म करने के लिए आगे आ रही है। इंटरकास्ट और इंटररिलिजन मैरिज के मामलों में तेजी देखी जा रही है।
इसी विषय पर अमर उजाला डॉट कॉम ने ऑनलाइन पोल में अपने पाठकों से सवाल पूछा था 'क्या आज की पीढ़ी पुरानी कुरीतियों को छोड़ने की हिम्मत रखती है?'
पोल के जवाब में हमें कुल 6,837 वोट मिले। इनमें 73.31 फीसदी (5012 वोट) पाठकों ने हां में जवाब देते हुए माना कि आज की पीढ़ी पुरानी कुरीतियों को छोड़ने की हिम्मत रखती है, जबकि 22.66 फीसदी (1549 वोट) पाठकों ने सवाल के जवाब में असहमति जताते हुए माना कि आज की पीढ़ी भी पुरानी कुरीतियों को छोड़ने की हिम्मत नहीं रखती है। वहीं 4.04 फीसदी (276 वोट) पाठकों ने इस मुद्दे पर कोई राय जाहिर करने में असमर्थता जताई।