बचपन में दिनभर बाहर खेलने के बाद घर में घुसते ही मम्मी-पापा की डांट पड़ने के बाद जो बात सबसे ज्यादा सुनने को मिलती थी वो थी "पढोगे-लिखोगे तो बनोगे नवाब, खेलोगे-कूदोगे तो होंगे खराब"। बचपन में शायद ही किसी ने यह लाइनें नहीं सुनी हों, उसकी बड़ी वजह थी कि उस समय पढ़ाई लिखाई को ही कामयाब होने का एकमात्र जरिया माना जाता था, लेकिन बदलते दौर के साथ युवाओं ने जमाने की नब्ज पकड़ी और अपनी अलग राह तैयार की।
इसी विषय पर अमर उजाला डॉट कॉम ने ऑनलाइन पोल में अपने पाठकों से सवाल पूछा था 'क्या यह सोच सही है कि 'पढ़ाई नहीं करोगे तो कुछ नही होगा?'
पोल के जवाब में हमें कुल 6,352 वोट मिले। इनमें 56.8 फीसदी (3608 वोट) पाठकों ने हां में जवाब देते हुए माना कि पढ़ाई नहीं करोगे तो कुछ नही होगा, जबकि 38.63 फीसदी (2454 वोट) पाठकों ने कहा कि बिना पढ़ाई किए भी कुछ बना जा सकता है। वहीं 4.57 फीसदी (290 वोट) पाठकों ने इस मुद्दे पर कोई राय जाहिर करने में असमर्थता जताई।