रोहिंग्या मुसलमानों पर केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामे के जरिए अपना पक्ष रखा है। केंद्र ने कहा कि करीब 40 हजार रोहिंग्याओं ने भारत में घुसपैठ की है, जिन्हें संवैधानिक दर्जा नहीं दिया जा सकता। केंद्र ने ये भी कहा कि रोहिंग्या शर्रार्थियों का भारत में रहना गैर कानूनी है। केंद्र सरकार को आंशका है कि इनमें से कुछ लोग आतंकवादी संगठनों के संपर्क में भी हैं।
केंद्र ने कहा कि म्यांमार से आ रहे रोहिंग्या शरणार्थियों के भारत में आने से क्षेत्र की स्थिरता को नुकसान पहुंच सकता है। ऐसे कुछ सुबूत भी हासिल हुए हैं जिसके तहत कुछ रोहिंग्या के पाकिस्तानी आतंकियों से लिंक मिले हैं। ऐसे में रोहिंग्या मुसलमान दूसरे लोगों को भारत में प्रवेश दिलाने के लिए जाली पैन कार्ड और वोटर आईडी जैसे भारतीय पहचान पत्र बनवाने और साथ ही मानव तस्करी में भी शामिल पाए गए।
अमर उजाला ने आनलाइन पोल कराया और पाठकों से सवाल पूछा, रोहिंग्या मुसलमानों के बारे में केंद्र की ओर से कही गई बातों से क्या आप सहमत हैं?" पोल में पाठकों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया।
पोल में कुल 14,855 पाठकों ने हिस्सा लिया। जिनमें 77.76 फीसदी यानि 11,551 पाठकों ने कहा कि रोहिंग्या मुसलमानों के बारे में केंद्र की ओर से हलफनामे में कही गई बातें सही हैं। वहीं 20.11 फीसदी यानि 2988 पाठकों का मानना है कि केन्द्र सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दिए हलफनामा सही नहीं है। 2.13 फीसदी यानि 316 पाठकों ने कह नहीं सकते, विकल्प को चुना।