बृहस्पतिवार को सपा अध्यक्ष व यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सपा के संस्थापक अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव को मनाने विक्रमादित्य मार्ग स्थित उनके आवास पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने मुलायम को आगरा में 5 अक्तूबर को होने वाले राष्ट्रीय अधिवेशन का निमंत्रण दिया और गिले-शिकवे दूर करने की कोशिश की। इस मुलाकात को मुलायम परिवार में चल रहे गतिरोध को तोड़ने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि पिता-पुत्र के रिश्तों में तल्खी की अटकलों के बीच मुलायम ने 25 सितंबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश को आशीर्वाद दिया था। उन्होंने नए दल के गठन से इन्कार किया था, लेकिन राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से हटाए जाने को लेकर उनकी टीस भी उभरी थी। अखिलेश ने इसके तुरंत बाद ट्वीट किया था, नेताजी जिंदाबाद-समाजवादी पार्टी जिंदाबाद।
पढ़ें- अमर उजाला पोल: लोग नहीं चाहते कमल हासन राजनीति में रखें कदम
इसी विषय पर अमर उजाला डॉट कॉम ने ऑनलाइन पोल में अपने पाठकों से सवाल पूछा था 'क्या इससे पिता-पुत्र के बीच की दूरी कम हो सकेगी?' पोल के जवाब में हमें कुल 7,439 वोट मिले। इनमें 65.76 फीसदी (4892 वोट) पाठकों ने हां में जवाब देते हुए माना कि इस कदम के बाद पिता-पुत्र के रिश्तों के बीच की दूरी कम होगी, जबकि 28.35 फीसदी (2109 वोट) पाठकों ने माना कि इससे पिता-पुत्र के बीच की दूरी कम नहीं हो सकेगी। वहीं 5.89 फीसदी (438 वोट) पाठकों ने इस मुद्दे पर कोई राय जाहिर करने में असमर्थता जताई।