नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन ने नोटबंदी पर फिर से सरकार की तीव्र आलोचना की है। उन्होंने कहा है कि नोटबंदी एक दिग्भ्रमित प्रक्षेपास्त्र (मिसाइल) है, जिसे लोकतांत्रिक नियमों की अनदेखी करते हुए एकतरफा दागा गया है। वहीं अरुण शौरी ने भी सरकार के फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि डंडे यहां फटकारे जा रहे हैं, जबकि काला धन विदेशों में पड़ा है।
नोबेल विजेता सेन ने विमुद्रीकरण को ‘निरंकुश कार्रवाई’ बताते हुए कहा कि यह जल्दी में लिया गया फैसला था। वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी ने कहा कि लोग यह कतई नहीं जानते कि नोटबंदी से काले धन को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। अमर्त्य सेन मुंबई में एक संवाद सत्र में ‘सबके लिए स्वास्थ्य सुविधा : क्यों और कैसे’ विषय पर बोल रहे थे, जबकि अरुण शौरी हैदराबाद में लिटरेचर फेस्टिवल में बोल रहे थे।
सेन ने कहा कि सरकार की ओर से जब तब एकतरफा ऐसी मिसाइल दागी जा रही है। नोटबंदी भी उन्हीं में से एक मिसाइल दागी गई थी, जिसके बाद लोगों की मुश्किलों और तकलीफों की रिपोर्ट आ रही हैं। उन्होंने लोकतांत्रिक देश भारत और साम्यवादी देश चीन में निर्णय लेने की तुलना की है।
उन्होंने कहा कि चीन में छोटे समूह को ध्यान में रख कर फैसले लिए जाते हैं, जबकि भारत में लोगों की मांग होने पर ही काम होता है। उधर शौरी ने आश्चर्य जताया कि आखिर इस फैसले से काले धन पर अंकुश कैसे लगेगा। जिसके पास असल में काला धन है क्या वह उसे भारत में रखेगा? जिनके पास काला धन है वह उसे विदेशों में रखते हैं।