एक अधिकारी के मुताबिक बाढ़ के साथ साथ भूस्खलन, फिसलन भरे मार्ग और पत्थर गिरने से यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए यात्रा को रोक दिया गया था। उन्होंने बताया कि किसी भी तीर्थयात्री को पैदल गुफा की ओर बढ़ने नहीं दिया जा रहा है। नदी के बांधों को रेत के बैग से प्लग किया गया ताकि पानी बांध को ना तोड़ सके। श्रीनगर के बाहरी क्षेत्र पांपोर और संगम इलाके में भी बांध में दरार पड़ने से पानी सड़कों पर आ गया जिसे तुरंत मौके पर पहुंची पुलिस टीमों ने प्लग कर दिया। हाइवे पर कुछ जगहों पर पानी भर जाने से ट्रैफिक को नए बाईपास से डायवर्ट किया गया है।
दक्षिण कश्मीर में 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित अमरनाथ गुफा की 60 दिवसीय यात्रा का समापन 26 अगस्त को होगा। यात्रा में खराब मौसम बार बार यात्रियों के लिए मुसीबत बन रहा है। इस बीच राजयपाल ने भी बाढ़ की स्थिति को देखते हुए अधिकारियों के साथ बैठक कर हालात का जायजा लिया। प्रशासन ने कई राहत केंद्रों और कंट्रोल रूम की स्थापना भी की है। उन्होंने लोगों को डरने की बजाय सतर्क रहने को कहा है।
राज्य में करीब 17 एसडीआरएफ और 2 एनडीआरएफ की टीमों को तैयार किया गया है। सभी सुरक्षा एजेंसियों को भी तैयार रहने को कहा गया है ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें बुलाया जा सके। सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण के चीफ इंजीनियर एम एम शाहनवाज ने बताया कि खतरे के निशान से ऊपर बह रही झेलम को ध्यान में रखते हुए पूरी तैयारी कर ली गई है।
वहीं मौसम विभाग का कहना है कि राज्य में 2014 जैसे हालात नहीं हैं लेकिन बारिश जरूर ज्यादा हुई है। विभाग के एक अधिकारी के अनुसार जमीन गीली है। लोगों को सतर्क रहना चाहिए क्योंकि भूस्खलन की संभावना है। इस बीच अमरनाथ यात्रियों को भी अगले 24 घंटों तक नहीं जाना चाहिए। इसका असर राष्ट्रीय राजमार्गों पर भी पड़ सकता है।