अमरनाथ दर्शन करने गए गोरखपुर के कई यात्री लौटते वक्त श्रीनगर में फंस गए हैं। करीब 20 घंटे से न तो उनके पास खाने के लिए भोजन है और न ही पीने के लिए पानी। घाटी में फैली हिंसा के बीच वहां सुरक्षा का भी कोई इंतजाम न होने से श्रद्धालुओं में मन में भय बना हुआ है।
मोबाइल फोन पर हुई बातचीत में उन्होंने मदद की गुहार लगाई है। गोरखपुर के कूड़ाघाट, जीआरडी और आसपास के 16 लोग अमरनाथ यात्रा पर निकले थे। इनमें से तीन तो दूसरे ग्रुप में शामिल हो गए। बाकी 13 लोगों का ग्रुप अलग यात्रा पर निकल गया।
उनमें शामिल जितेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि बाबा बर्फानी का दर्शन कर लौटते वक्त ग्रुप में शामिल तीन श्रद्धालु किसी और ग्रुप में शामिल हो गए। उनकी कोई जानकारी नहीं है। मेरे साथ अवधेश गुप्ता, विशाल गुप्ता, संजीव गुप्ता, मोनू निषाद, ओमप्रकाश निषाद, उदय यादव, दिग्विजय गुप्ता, कमल चौधरी और रूपेश चौधरी हैं।
सभी श्रीनगर में फंसे हुए हैं। सोमवार सुबह ही यहां पहुंचे हैं, लेकिन हमारे पास खाने-पीने का कोई इंतजाम नहीं है। 37 हजार रुपये में हमने जिस गाड़ी को बुक किया है, उसका ड्राइवर भी कश्मीर में भड़की हिंसा के कारण आने को राजी नहीं हो रहा है। गाड़ी पहलगाम में खड़ी है। ड्राइवर ने बताया कि दो लंगरों में आग लगा दी गई है। इस वजह से ड्राइवर आने को तैयार नहीं है। भूखे-प्यासे सभी की हालत बहुत खराब है। आर्मी का कोई जवान नहीं दिखाई देने से मन में डर बना हुआ है। जल्द से जल्द हमें कुछ मदद की दरकार है।
दहशत के साए से सुरक्षित निकले 30 यात्री
वहीं, बालटाल में फंसे बरेली के 30 अमरनाथ यात्री दहशत के साए से निकलकर सोमवार दोपहर सुरक्षित जम्मू पहुंच गए। उन्हें सेना ने कड़ी सुरक्षा में दंगाग्रस्त इलाके से बाहर निकाला।
सपा नेता बृजेश श्रीवास्तव और दवा व्यापारी महेशचंद्र गुप्ता ने बताया कि वे पांच जुलाई को अमरनाथ यात्रा पर घर से निकले थे। आठ तारीख को अमरनाथ पहुंचकर दोपहर करीब दो बजे बाबा बर्फानी के दर्शन किए। उसी शाम को लौटकर बालटाल पहुंचे तो आतंकी बुरहान और श्रीनगर में दंगा होने का पता चला और दो दिन तक वहीं फंसे रहे।
रविवार रात आठ बजे अमरनाथ यात्रियों को बालटाल से निकाले जाने का पता चला तो अफरा-तफरी मच गई। हर कोई वहां से पहले निकलने की कोशिश में था। बालटाल से करीब दो किलोमीटर दूर गेट नंबर दो पर बने टैक्सी स्टैंड पर भीड़ उमड़ी तो टैक्सी वाले जम्मू तक का दस गुना तक किराया वसूल रहे थे। बरेली के सभी 30 अमरनाथ यात्री रात में करीब एक बजे टैक्सी में जम्मू के लिए रवाना हुए। यात्रियों की 40-50 टैक्सियों के साथ आगे-पीछे सेना की पांच-छह गाड़ियां चल रही थीं।
उन्होंने बताया कि रास्ते में श्रीनगर, मोनमर्ग, अनंतनाग समेत पूरे दंगाग्रस्त इलाके में सेना के जवान मुस्तैद थे। फिर भी हर यात्री बुरी तरह दहशत में था। विशेषकर बस्ती के आसपास। रोड पर ईंट-पत्थर, टूटे कांच के टुकड़े, टीगार्ड, कंटीले पड़े थे। कदम-कदम पर खतरा महसूस हो रहा था। टैक्सी चालक से पता चला कि दंगाइयों के हमला करने पर सेना के जवान भी भाग जाते हैं।
इसकी वजह एक यह भी है कि फोर्स को गोली चलाने का आदेश नहीं है। इसके बाद तो मौत सामने नजर आने लगी। करीब तीन घंटे का सफर तय करने के बाद रात में चार बजे चालक ने टैक्सी एक भंडारा स्थल पर रोकी। चालक ने बताया कि यहां कोई खतरा नहीं। दंगाग्रस्त इलाका निकल चुका है। कहीं तब जाकर सबकी जान में जान आई। सोमवार को बरेली के 30 यात्री सुरक्षित कटरा (जम्मू) पहुंच गए।