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हाइटेक नौकरी छोड़ सब्जियों की खेती में जुटा नौजवान, आज कमा रहा करोड़ों

Mon, 04 Jun 2018 12:19 PM IST
रिंपी गुप्ता, अमर उजाला, पटियाला
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पटियाला के नाभा ब्लॉक के साधोहेड़ी गांव के नौजवान अमरिंदर सिंह ने नीदरलैंड जाकर ऊंची पढ़ाई (एमएससी, जियो इंफोर्मेटिक्स) की और पंजाब सरकार के रिमोट सेंसिंग सेंटर में वैज्ञानिक के तौर पर करीब 4 वर्ष सेवाएं दीं, लेकिन असली संतुष्टि तो उन्हें सब्जियों का सफल काश्तकार बनकर ही मिली।

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यह प्रगतिशील किसान आज रंग-बिरंगे शिमला मिर्च, मशरूम, खीरा, करेला, हरी मिर्च और खरबूजों की उन्नत खेती अत्याधुनिक तरीकों से करके जहां प्रति एकड़ अच्छा लाभ कमा रहे हैं, वहीं अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत भी बने हुए हैं।

सफल सब्जी उत्पादक बने अमरिंदर  
साल 2013 में नौकरी छोड़कर अपनी 32 एकड़ पारिवारिक जमीन पर कृषि का परंपरागत पेशा अपनाने वाले अमरिंदर सिंह ने 4,000 वर्ग मीटर के पॉली हाउस से सब्जियों के उत्पादन की शुरुआत की। बाद में 2014 में 4,000 वर्ग मीटर का एक और पॉली हाउस बनाया।
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बागवानी विभाग ने अमरिंदर सिंह को प्रति पॉली हाउस 16,88,000 रुपये और काश्त वाले सामान पर 2,80,000 रुपये प्रति पॉली हाउस अलग से सब्सिडी मुहैया कराई। जबकि, उनके मशरूम के कंपोस्ट यूनिट के लिए भी सब्सिडी को स्वीकृति मिल गई है। पंजाब सरकार के बागवानी विभाग की तरफ से मिले सहयोग, सब्सिडी और तकनीकी सहायता के बलबूते अमरिंदर सिंह एक सफल सब्जी उत्पादक बन गए हैं।
 

पहले लोग हंसते थे, अब आते हैं पूछने 

अमरिंदर सिंह ने बताया कि उसने जब अपनी राजपत्रित अधिकारी की सरकारी नौकरी छोड़ी थी, तो लोग उसका मजाक उड़ाते थे। लेकिन आज उन्हें अपने फैसले पर गर्व महसूस होता है, क्योंकि अन्य किसान भी उनसे उनके जैसी खेती करने के बारे में अक्सर पूछताछ करते रहते हैं। 

 
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अवशेषों का खेतों में ही इस्तेमाल

उनका कहना है कि उनके पास अत्याधुनिक कृषि यंत्र हैं। इसके अतिरिक्त वह ग्रीन हाउस पॉलीनेट, ड्रिप सिंचाई, मलचिंग और लो टनल तकनीक अपनाने को लेकर अध्ययन के लिए विभिन्न कृषि केंद्रों का दौरा भी करते रहते हैं। ऐसा करने से सब्जियों में कीटनाशक दवाओं का प्रभाव जीरो फीसदी करने, भूमिगत जलस्तर की बचत और खेती के अवशेषों का खेतों में ही इस्तेमाल करने में मदद मिलती है, जिससे धरती की उपजाऊ शक्ति भी बढ़ती है।

अतिरिक्त लाभ के लिए किसानों की मदद
पटिलाया के बागवानी विभाग कार्यालय के डिप्टी डायरेक्टर स्वर्ण मान सिंह ने बताया कि विभाग की तरफ से अमरिंदर सहित अन्य किसानों को समय-समय पर तकनीकी सहायता प्रदान की जाती है, जिससे वे खेती लागत घटाकर अतिरिक्त लाभ कमा सकें।
 
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