अमरिंदर सिंह ने बताया कि उसने जब अपनी राजपत्रित अधिकारी की सरकारी नौकरी छोड़ी थी, तो लोग उसका मजाक उड़ाते थे। लेकिन आज उन्हें अपने फैसले पर गर्व महसूस होता है, क्योंकि अन्य किसान भी उनसे उनके जैसी खेती करने के बारे में अक्सर पूछताछ करते रहते हैं।
उनका कहना है कि उनके पास अत्याधुनिक कृषि यंत्र हैं। इसके अतिरिक्त वह ग्रीन हाउस पॉलीनेट, ड्रिप सिंचाई, मलचिंग और लो टनल तकनीक अपनाने को लेकर अध्ययन के लिए विभिन्न कृषि केंद्रों का दौरा भी करते रहते हैं। ऐसा करने से सब्जियों में कीटनाशक दवाओं का प्रभाव जीरो फीसदी करने, भूमिगत जलस्तर की बचत और खेती के अवशेषों का खेतों में ही इस्तेमाल करने में मदद मिलती है, जिससे धरती की उपजाऊ शक्ति भी बढ़ती है।
अतिरिक्त लाभ के लिए किसानों की मदद
पटिलाया के बागवानी विभाग कार्यालय के डिप्टी डायरेक्टर स्वर्ण मान सिंह ने बताया कि विभाग की तरफ से अमरिंदर सहित अन्य किसानों को समय-समय पर तकनीकी सहायता प्रदान की जाती है, जिससे वे खेती लागत घटाकर अतिरिक्त लाभ कमा सकें।