योगगुरु रामदेव अपनी बेबाकी के लिए जाने जाते हैं। योग और आयुर्वेद को घर-घर में लोकप्रिय बनाने वाले रामदेव लगातार बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य और राजनीतिक मुद्दों पर भी उतनी ही मुखरता से बात करते हैं, जितनी संस्कृति और शिक्षा पर करते हैं। वे अक्सर वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका को लेकर भी बातचीत करते हैं। आज हरियाणा के गुरुग्राम में उन्होंने योग की संस्कृति और 'सनातन की बात' विषय पर विस्तार से अपनी बातें रखीं। अमर उजाला डिजिटल के संपादक जयदीप कर्णिक के साथ संवाद के दौरान स्वामी रामदेव ने शुद्ध हवा को सांविधानिक अधिकार बताया। जानिए रामदेव ने किन बातों पर दिया विशेष जोर
दिल्लीवालों के फेफड़ों का अध्ययन किया जाए तो वो काले-काले मिलेंगे। जो सिगरेट-बीड़ी नहीं पी रहे, उनके साथ भी ऐसा हो रहा है। उम्र घट रही है। शुद्ध हवा, आहार, पानी हमारा संवैधानिक अधिकार है। फिर भी हम जहर पी रहे हैं। आपके फेफड़े यदि मजबूत हैं, तो वो प्रदूषण को बाहर फेंक देंगे। महंगी-महंगी मशीनें लगाने की जरूरत नहीं है। दिल मजबूत है, तो कॉलेस्ट्रोल को बाहर फेंक देगा। लीवर मजबूत है, तो फैट बाहर फेंक देगा। हमारा शरीर भीतर से योद्धा है। वह हारना नहीं चाहता। शरीर सर्दी-गर्मी से लड़ता है। सभी सरकारों को भी ध्यान देना चाहिए। हमें यह सोचना पड़ेगा कि सिर्फ परिवार ही हमारा नहीं है। पर्यावरण भी हमारा है। इसे गंदा नहीं होने देना चाहिए। ज्यादा पानी प्रयोग करना, हवा को दूषित करना भी पाप है। प्रकृति हमारी मां है। हम उसका दुरुपयोग नहीं कर सकते। उसका रक्तपान नहीं कर सकते।
आपका रुझान योग और सनातन की तरफ कब से हुआ?
बाबा रामदेव: मेरे मन में मैकाले की शिक्षा पद्धति से विद्रोह था। मुझे अंग्रेजों की परंपरा से नहीं पढ़ना था। मुझे अंग्रेजों का मानस पुत्र नहीं बनना था। आर्थिक-सांस्कृतिक गुलामी मंजूर नहीं थी। मुझे गुरुकुल परंपरा से पढ़ने का मौका मिला। हम इसी परंपरा से बच्चों को पढ़ा भी रहे हैं। हमारे बच्चे को शास्त्र भी कंठस्थ हो जाते हैं। बच्चों में संस्कार जगाते हैं। मुझे नहीं पता था कि दुनिया मुझे योगी बना देती। ...कोई भी बोर्ड ऐसा नहीं है कि सनातन के बोध के साथ शिक्षा दी जाती हो। हम इतने जड़तावादी हो गए हैं कि हम सोचते नहीं। जिन मुगलों-आक्रांताओं ने देश को लूटा, उन्हें अब भी हम महिमामंडित कर रहे हैं। हर राज्य की शिक्षा प्रणाली बदलनी चाहिए।
लेकिन फिर शिक्षा के भगवाकरण के आरोप लगते हैं?
बाबा रामदेव: सबके भीतर भगवा है। लोगों ने खूब कोशिश करके देख ली। भारत सनातन परंपरा का देश है। इसे आप नकार नहीं सकते। ढाई सौ साल पहले तो हमारी सौ ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था रही होगी। इसे दरिद्र बना दिया गया। हम दोबारा यह पुरुषार्थ कर सकते हैं। इसमें पांच-दस-पच्चीस साल लग सकते हैं, लेकिन हमें करना होगा। हमें अपनी हैसियत समझनी होगी। जिस देश के 140 करोड़ लोग पूरी ऊर्जा के साथ राष्ट्र निर्माण में लग जाएंगे, तब भारत सामरिक महाशक्ति बनेगा। चाहे जनशक्ति हो, धनशक्ति हो, सैन्यशक्ति हो, भारत सबसे आगे था।