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Aniruddhacharya: अनिरुद्धाचार्य बोले- दुनिया में 52 मुस्लिम देश, भारत हिंदू राष्ट्र बने तो किसी को एतराज न हो

Thu, 17 Apr 2025 05:27 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ

सार

अमर उजाला के मंच पर गौरी गोपाल आश्रम के संस्थापक डॉ अनिरुद्धाचार्य ने ''सनातन धर्म और आध्यात्म' के विषय पर बेबाकी से अपने विचार रखे। उन्होंने संवाद की शुरुआत श्रीमदभगवतगीता के 18वें अध्याय के 66वें श्लोक से की। उन्होंने कहा कि दुनिया में 52 मुस्लिम देश हैं, ऐसे में भारत के हिंदू राष्ट्र बनने पर किसी को एतराज नहीं होना चाहिए। उन्होंने नारी उत्पीड़न के खिलाफ सख्ती को लेकर भी अपनी बात रखी।
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अमर उजाला संवाद के दौरान अनिरुद्धाचार्य - फोटो : अमर उजाला
अमर उजाला संवाद 2025 के मंच पर आध्यात्मिक वक्ता और गौरी गोपाल आश्राम के संस्थापक अनिरुद्धाचार्य ने अपने विचार रखे। उन्होंने सनातन धर्म और आध्यात्म के विषय के साथ-साथ आधुनिक दौर में सोशल मीडिया का धड़ल्ले से हो रहे इस्तेमाल पर भी बेबाकी से बात की। सबसे पहले उन्होंने लखनऊ में संवाद के सदन में मौजूद जनता से पौराणिक श्लोक- 'सच्चिदानंद रूपाय विश्वोत्पत्यादिहेतवे, तापत्रय विनाशाय श्री कृष्णाय वयं नमः' के उच्चारण का आह्वान भी किया।

इसके बाद उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता के 18वें अध्याय के 66वें श्लोक से उन्होंने अपने संवाद का आगाज किया।

सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज। 
अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः

सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल पर उन्होंने कहा कि इंटरनेट के इस युग में सोशल मीडिया पर सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह के कंटेट हैं। बकौल अनिरुद्धाचार्य, वे खुद पर बनने वाले मीम भी देखते हैं, ये लोगों को हंसाने का काम करते हैं। वे खुद भी इसका सकारात्मक इस्तेमाल करने का प्रयास करते हैं।

13-14 वर्ष की आयु में संतों को भोजन कराया, आज अन्नक्षेत्र में 30-40 हजार लोग प्रसाद पाते हैं
व्यासपीठ पर बतौर कथावाचक अपनी यात्रा शुरुआत के बारे में बताते हुए अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि मध्य प्रदेश के जबलपुर में उनका जन्म हुआ। उन्होंने बताया कि पिता गांव के मंदिर में पुजारी थे। वे गांव में भिक्षाटन करने भी जाते थे। एक दिन दोपहर करीब 12-1 बजे आठ-दस संतों का आगमन हुआ। उन्होंने भोजन की इच्छा जाहिर की। मैं 13-14 वर्ष का था। वे उन संतों को अपने घर ले गए और मां को भोजन कराने को कहा। अनाज-आटे की कमी थी, ऐसे में वे पड़ोस की मौसी के घर से आटा-नमक लाए और उन्हें खीर-पूड़ी खिलाई। इसी समय उनके मन में यह विचार आया कि बड़े होने पर वे संतों के लिए अन्नक्षेत्र का संचालन करेंगे। ये उनका सपना बन गया। बकौल अनिरुद्धाचार्य, आज अन्न क्षेत्र गौरी-गोपाल में 30-40 हजार लोग हर दिन प्रसाद पाते हैं। 
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अमर उजाला संवाद के मंच पर भागवत कथावाचक अनिरुद्धाचार्य - फोटो : अमर उजाला
वो कौन सा क्षण था, जब लगा कि अध्यात्म की ओर जाना है?
अनिरुद्धाचार्य:
एक बार गांव में भागवत की कथा हुई। मां मुझे लेकर गईं। उन्होंने मेरे लिए आशीर्वाद मांगा कि मन्नू भी भागवत सुनाए। मैंने भी मां की इच्छा पूरी की और भागवत सुनाने वाला बन गया। 

संत बनना आजकल पैशन के साथ-साथ फैशन भी हो गया है, आप इससे सहमत हैं?
अनिरुद्धाचार्य:
लोग क्या करते हैं, हमें इससे मतलब नहीं। हमने केवल समाज की सेवा की है। आज मेरी आयु 34 साल है। इस उम्र के लड़के शराब पीकर क्लबों में घूम रहे हैं। इस उम्र में हमने पढ़ाई की और पढ़कर समाज सेवा की। आज 290 वृद्ध मांओं का बेटा बनने का मौका मिला। मैंने गौरी-गोपाल गुरुकुल की स्थापना की और बच्चों को वहां नि:शुल्क पढ़ा रहे हैं। 400 गोमाता और 125 नंदी की सेवा करते हैं। जब बच्चे अपने माता-पिता से पैसे मांगकर शौक पूरा कर रहे हैं, वहां हम यह काम कर रहे हैं। बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय, जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय।
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अमर उजाला संवाद के मंच पर भागवत कथावाचक अनिरुद्धाचार्य - फोटो : अमर उजाला
हिंदू राष्ट्र बनाने को लेकर आजकल कई संत बात कर रहे हैं, उस पर आपकी क्या राय है? 
अनिरुद्धाचार्य:
लगभग 52 देश मुस्लिम देश हैं। अगर उससे हमें कोई एतराज नहीं है तो भारत हिंदू राष्ट्र हो जाए तो उससे किसी को एतराज नहीं होना चाहिए। हिंदू राष्ट्र होने का यह मतलब नहीं कि मुसलमान यहां नहीं रहेंगे। मुसलमान यहां थे, हैं और रहेंगे। यहां हिंदू राष्ट्र बनेगा तो गाय राष्ट्रमाता बनेगी। महाराष्ट्र में गोमाता को राज्यमाता का दर्जा मिला है। हिंदू राष्ट्र होगा तो इसका यह मतलब है कि हिंदुओं का पक्ष मजबूत होगा। अभी हमारे सामने गाय काट दी जाती है, हमारी आस्था का सम्मान नहीं होता। इंदिरा गांधी जी स्वामी करपात्री के पास समर्थन मांगने गई थीं। तब स्वामी जी ने कहा था कि क्या आप गोहत्याओं पर प्रतिबंध लगाएंगी? जब वे प्रधानमंत्री बन गईं, तब स्वामी जी ने दिल्ली तक यात्रा निकाली और वहां इंदिरा जी से सवाल पूछा तो सरकार ने उनके समर्थकों पर गोलियां चलवा दीं

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अमर उजाला के मंच पर अनिरुद्धाचार्य का वक्तव्य - फोटो : अमर उजाला
क्या देश में बदलाव महसूस होता है? 
अनिरुद्धाचार्य:
बहुत कुछ तो नहीं बदला है, फिर भी मेरा मानना है कि मोदी जी अगर हजार-पांच सौ का नोट बंद कर सकते हैं तो गोहत्या भी बंद कर सकते हैं। वे रात आठ बजे देश के सामने आकर कहें तो गोहत्या बंद हो जाए। जैसे नया वक्फ कानून गरीब मुसलमानों को अधिकार देने के लिए है। जैसे प्रयागराज के महाकुंभ क्षेत्र पर भी वक्फ बोर्ड ने दावा कर दिया था। गंगा मैया ने इस बात का इलाज कर दिया।
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अमर उजाला के मंच पर अनिरुद्धाचार्य का वक्तव्य - फोटो : अमर उजाला
क्या दूसरे समुदाय को लेकर कोई खटास है?
अनिरुद्धाचार्य:
हम किसी से नफरत नहीं करते। हम ही हैं, जो कहते हैं कि ईश्वर-अल्लाह तेरो नाम। कहीं और से तो आज तक ऐसी आवाज नहीं आई। हमारे मन में कोई खटास नहीं है। सर्वधर्म की अवधारणा ही गलत है। धर्म एक ही है सनातन। इस्लाम मजहब है, सिख पंथ है। गंगा और गंगा की नहर है। नदी से निकली धारा का नाम नहर है। एक सनातन धर्म से बाकी मजहब और पंथ निकले हैं। अगर मजहब और धर्म में फर्क नहीं होता तो सभी धर्म में लोग पत्नी को धर्मपत्नी कहते। धर्म कोई सब्जी नहीं। मूल में तो सनातन ही रहेगा।
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अमर उजाला के मंच पर महिला उत्पीड़न को लेकर बोले अनिरुद्धाचार्य - फोटो : अमर उजाला
सनातन को यह भी सिखाता है कि किसी भी मार्ग से जाएं, ईश्वर तो एक है
अनिरुद्धाचार्य: हम कहां किसी का गला पकड़ने जा रहे हैं। हमारे देश में घुसकर लोगों ने गर्दन काटी। सत्रह बार पृथ्वीराज चौहान ने मोहम्मद गोरी को छोड़ा। हमारे यहां दया-धर्म का मूल्य है। दयावान हम हैं, हम 17 मौके देते हैं, चिड़ियों को पानी देते हैं, सांप को दूध पिलाते हैं। क्या उनमें दया है? दया की बात करना और दयावान होना अलग बात है। इस धरती पर केवल हिंदू दयावान हो सकता है क्योंकि हिंदू एक विचारधारा है। उस नालायक मोहम्मद गोरी की वजह से संयोगिता को जौहर करना पड़ा। इतनी दया मत करिए कि बहन-बेटियों को जिंदा जलना पड़े। गीता से काम न चले तो गांडीव उठाओ।
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अमर उजाला संवाद के मंच पर भागवत कथावाचक अनिरुद्धाचार्य - फोटो : अमर उजाला
आगरा के एक नेता राणा सांगा को गलत बताते हैं, महाराष्ट्र के एक नेता औरंगजेब को नायक बताते हैं, इस पर क्या कहेंगे? 
अनिरुद्धाचार्य:
औरंगजेब के वंशज तो पाकिस्तान में रहते हैं, ऐसे लोग वहीं चले जाएं सपरिवार। खाएंगे रोटी यहां की और बखान करेंगे उन मूर्खों का। ऐसे लोगों को उल्टा लटकार मिर्ची का धुआं देना चाहिए। राणा सांगा को गद्दार बताने वालों से यह पूछना चाहिए कि हमारे यहां गद्दार कौन थे, यह इतिहास बता देगा। उन्हें इतिहास पढ़ना चाहिए। ये पढ़ते-लिखते नहीं। जो पढ़े ही ना, बस बात करें, उससे क्या माथापच्ची करना।

इस तरह का न्याय सही होगा? 
अनिरुद्धाचार्य:
पहले चोरी करने वालों के हाथ काट लिए जाते थे। आज बलात्कारियों को बंद कमरे में नहीं, कैमरे के सामने फांसी क्यों नहीं दी जाती। बलात्कार करने वाले का केस दस साल चलता है। फांसी की सजा सुनाई जाती है, तब भी फांसी कब दी जाएगी, यह नहीं पता रहता। एक बार चौराहे पर फांसी दो, बेटियां सुरक्षित हो जाएंगी।
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अमर उजाला संवाद के मंच पर भागवत कथावाचक अनिरुद्धाचार्य - फोटो : अमर उजाला
हर मंदिर के नीचे मस्जिद ढूंढना क्या सही है?
अनिरुद्धाचार्य:
इतिहास यही कहता है कि मंदिर तोड़कर मस्जिदें बनाई गईं। जहां-जहां मंदिरें तोड़कर मस्जिदें बनाई गईं तो वहां मंदिर बन जाए। इसमें हमारी, उनकी, सबकी सहमति रहे। यही तो भाईचारा है। हमारी जमीन हमें दे दो, यही है भाईचारा। हम ही भाईचारे का ठेका लें? हम तो अभी मथुरा की बात कर रहे हैं। एकै साधे सब सधै, सब साधे सब जाय। 

लोग कहते हैं कि एक तरफ आप अच्छी बात करते हैं, दूसरी तरफ आपकी रील बन जाती है, इस पर क्या कहेंगे? 
अनिरुद्धाचार्य:
हम तो केवल मुद्दे की बात करते हैं। मुद्दे की बात को लोग कांट-छांटकर अपने तरीके से प्रस्तुत करते हैं। जिसे जो अच्छा लगता है, वह उसकी रील्स और मीम्स बना लेता है। मेरी बात लोगों को हंसाती भी है, लोगों को ज्ञान से भी भर देती है। 

श्रोताओं के सवाल पर अनिरुद्धाचार्य-

राणा सांगा के बारे में टिप्पणियां करने वालों के साथ क्या होना चाहिए?
अनिरुद्धाचार्य: कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। हिंदू राष्ट्र होता तो हमारे बीते हुए कल के बारे में और राष्ट्र नायकों को कोई कुछ गलत नहीं कह सकता था। अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर आज कोई कुछ भी कह देता है। 

युवाओं की उत्पादकता कैसे बढ़े? 
अनिरुद्धाचार्य: युवाओं के साथ गलती यह हुई कि उनके माता-पिता ने उनके दिमाग में यह कचरा घुसा दिया कि आपको बड़ा होकर नौकरी करनी है। हर बच्चे को बचपन से इसलिए पढ़ाई करनी चाहिए कि वह नौकरी करने वाला नहीं, रोजगार देने वाला बने। आपको नौकर क्यों बनना है?

धर्म संसद में क्या आधुनिक गुरुकुल बनाने की बात नहीं होती?
अनिरुद्धाचार्य:
देश आजाद हुआ तो पहले शिक्षा मंत्री ही मुसलमान बन गए। मदरसे आगे बढ़ते गए, लेकिन गुरुकुल खत्म होते चले गए।
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