वैश्विक स्तर पर भारतीय सेना के विस्तार पर पूर्व सेना प्रमुख ने कहा कि 'हमारी सुरक्षा चुनौतियां अलग तरह की हैं। हमारी सीमाएं जटिल हैं। हम भी वैश्विक स्तर पर उभरना चाहते हैं, लेकिन उसके लिए हमें विभिन्न देशों में अपने सैन्य अड्डे बनाने की ही जरूरत नहीं है।'
अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में पहुंचे पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे ने देश की सुरक्षा चुनौतियों पर खुलकर बात की। इस दौरान पूर्व सेना प्रमुख ने चीन की चुनौती और चिकन नेक के मुद्दे पर भी अपने विचार रखे। थिएटर कमांड को लेकर रिटायर्ड जनरल मनोज पांडे ने कहा कि 'थल सेना, वायु सेना और नौसेना की क्षमाओं को बढ़ाने और इनके बीच बढ़ाने के लिए समन्वय बेहद जरूरी है। इस दिशा में काम चल रहा है। सीडीएस पद की शुरुआत भी उसी दिशा में उठाया गया कदम है। हालांकि हमें ये भी ध्यान रखना होगा कि किसी देश में जो मॉडल है, हम उसी मॉडल को नहीं अपना सकते। हमें अपनी जरूरतों को देखते हुए इसमें बदलाव करते हुए अपना मॉडल बनाने की कोशिश चल रही है।'
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चिकन नेक को लेकर क्या बोले जनरल मनोज पांडे
चिकन नेक के मुद्दे पर बीते दिनों बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने बयान दिया था। मोहम्मद यूनुस के बयान पर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई थी। अब पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे से जब इसे लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि 'जो भी खतरे हैं, वर्तमान में और भविष्य में सही दिशा में खुद को तैयार करने के लिए हम कार्यरत हैं। मुझे विश्वास है कि हम सभी खतरों से निपटने में सक्षम हैं।' चिकन नेक पश्चिम बंगाल में एक संकरा भू-भाग है, जो पूर्वोत्तर भारत को शेष भारत से जोड़ता है। यह इलाका 22 किलोमीटर चौड़ा होने के कारण मुर्गी की गर्दन की तरह पतला होता है, इसके कारण ही इसे चिकन नेक कहा जाता है।
वैश्विक स्तर पर भारतीय सेना के विस्तार पर पूर्व सेना प्रमुख ने कहा कि 'हमारी सुरक्षा चुनौतियां अलग तरह की हैं। हमारी सीमाएं जटिल हैं। हम भी वैश्विक स्तर पर उभरना चाहते हैं, लेकिन उसके लिए हमें विभिन्न देशों में अपने सैन्य अड्डे बनाने की ही जरूरत नहीं है। हालांकि हम इस दिशा में काम कर रहे हैं।'
अग्निपथ योजना के गिनाए फायदे
अग्निपथ योजना को लेकर पूर्व सेना प्रमुख ने कहा कि 'जब कोई नया परिवर्तन होता है तो शुरू में उसे लेकर लोगों के मन में बहुत से विचार होते हैं, लेकिन जैसे जैसे समय बीता और लोगों को इस योजना के फायदों के बारे में पता चला, तो अब वो परेशानी दूर हो गई है। अग्निवीर जब चार वर्ष के कार्यकाल के बाद वापस आएंगे तो उस युवा में अनुशासन, समर्पण जैसी खूबियां उस युवक को जीवन में आगे लेकर जाएंगी। राज्य सरकारों में मेरा ये सुझाव है, सरकार ऐसे युवाओं को सरकार के विभिन्न विभागों में उन्हें शामिल कर उनकी क्षमता का पूरा उपयोग करे।'