रागिब का सवाल भी नितिन गडकरी से है। उन्होंने पूछा है कि, 'शिक्षा का अधिकार कानून के तहत कक्षा आठ तक के छात्रों को फेल नहीं किया जा सकता लेकिन हमारे प्रदेश के शिक्षा मंत्री जी कह रहे हैं कि कक्षा 5वीं और 8वीं की बोर्ड परीक्षा होगी। बोर्ड परीक्षा का कया लाभ होगा जब छात्र फेल ही नहीं होगा?'
आयुष कुमार का कहना है कि राज्य के मुख्यमंत्री को जमीनी स्थिति का पता ही नहीं चल पाता। आयुष ने नितिन गडकरी से सवाल किया है कि, 'सर, मुख्यमंत्री द्वारा औचक निरिक्षण की प्रथा कहां गुम हो गई? आप कृपया इस संबंध में अपनी राय व्यक्त कीजिए। क्योंकि प्रोटोकाल के तहत मुख्यमंत्री का दौरा होता है जहां उन्हें सब कुछ अच्छा दिखाने की कोशिश की जाती है।'
अफसाना बानो ने प्रधानमंत्री से सवाल किया है कि, 'देश में बेरोजगारी की बढ़ती हुई समस्या को दूर करने का आपका वादा पूरा क्यों नहीं हुआ? सर, आपने देश का मान सम्मान बढ़ाया है। बस आपसे एक गुजारिश है कि केंद्र सरकार हो या राज्य सरकार, सबको कोई ना कोई रोजगार जरूर उपलब्ध कराएं। क्योंकि जब सब लोग काम में व्यस्त हो जाएंगे तो देश में ना दंगे होंगे ना ही अपराध बढ़ेगा।'
चंदू परसवान ने मुख्यमंत्री और पर्यटन मंत्री से सवाल किया है कि, 'सरकार अभी तक युवाओं के लिए रोजगार की घोषणाओं के सिवा कुछ भी नहीं कर पाई है। उत्तराखण्ड में पर्यटन के क्षेत्र में रोजगार की अपार सम्भावनाएं हैं जिसको जमीन पर उतारने के लिए सरकार को युवाओं में जागरूकता के साथ-साथ उन्हें प्रशिक्षित करने की भी जरूरत है। आखिर युवाओं की रोजगार की समस्या के निदान के लिए कब जमीनी स्तर पर कार्य शुरू होगा।'
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