संसद का पूरा शीतकालीन सत्र हंगामे की भेंट चढ़ गया। विपक्ष और सत्तापक्ष दोनों एक-दूसरे पर सदन न चलने का आरोप लगाते रहे।
8 नवंबर को मोदी सरकार ने नोटबंदी का एलान किया था। उसके बाद संसद का शीतकालीन सत्र शुरू हुआ। सदन के दोनों ही सदनों में दोनों ही बड़ी पार्टियां खुद चर्चा करने और दूसरे पर चर्चा से भागने का आरोप लगाती रहीं।
मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस इस बात पर अड़ी रही कि प्रधानमंत्री मोदी को सदन में बैठकर पूरी बहस सुननी चाहिए और जवाब देना चाहिए। पीएम सदन में पहुंचे भी लेकिन पूरी चर्चा के दौरान नहीं रहे। इसी बात पर विपक्षी पार्टियां विफरी रहीं और सदन के दोनों सदन हंगामे की भेंट चढ़ते रहे।
नियमतः सदन को चलाने की जिम्मेदारी सरकार की होती है। विपक्ष उसमें सहयोग करता है। लेकिन संसद के शीतकालीन सत्र में दोनों ही पक्षों का रवैया अपनी भूमिका के अनुरुप नहीं रहा।
अमर उजाला ने इस पर एक ऑनलाइन पोल कराया। पोल का सवाल था कि क्या विपक्ष ने शीतकालीन सत्र में अपनी भूमिका का सही निर्वाहन किया है?
इस पोल पर करीब 6600 लोगों ने वोटिंग की। पोल की वोटिंग के अनुसार पाठकों ने माना कि विपक्ष ने अपनी भूमिका का सही निर्वाहन नहीं किया।
लगभग 72 प्रतिशत लोगों ने कहा कि विपक्ष ने अपनी भूमिका सही तरीके से नहीं निभाई। ऐसे कहने वालों की संख्या 4726 थी। इस पोल में हिस्सा लेने वाले लगभग 27 प्रतिशत लोगों का मानना था कि विपक्ष में अपनी भूमिका का सही निर्वाहन किया। 1.5 प्रतिशत लोग ऐसे भी थे जिन्होंने कह नहीं सकते का विकल्प चुना।