स्मार्टफोन आज के युवाओं की जिंदगी में बड़ा बदलाव लेकर आए हैं। इक्कीसवीं सदी के युवा ज्यादा स्ट्रैस नहीं लेते। युवाओं ने साबित किया है की जरूरी नहीं है की सिर्फ पढ़ाई लिखाई से ही आगे बढ़ा जा सकता है।
आज आपको किसी 'ब्रेक' की भी जरूरत नहीं है आपका फोन ही आपका मौका है, और उसी को इस्तेमाल कर आप अपने टैलेंट को देश और दुनिया तक पहुंचा सकते हैं।
स्मार्टफोन के लगातार इस्तेमाल से किशोरों के अवसाद, बेचैनी और अनिद्रा जैसी बीमारियों की चपेट में आने की आशंका बढ़ जाती है। लेकिन इससे होने वाली कई तरह की समस्याओं के बारे में कई बार चेतावनी भी दी जाती है।
इस विषय पर अमर उजाला डॉट.कॉम ने पोल कराया और पाठकों से सवाल पूछा कि 'क्या आज के युवा फोन को हर मर्ज की दवा समझते हैं? सवाल के जवाब में पाठकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
कुल 8584 पाठकों ने पोल में हिस्सा लिया। 79.81 फीसदी (6851 वोट) ने माना फोन युवाओं के हर मर्ज की दवा। जबकि 16.6 फीसदी पाठक (1425 वोट) ने माना ऐसा नहीं है। वहीं, 3.41 फीसदी (255 वोट) पाठकों ने कह नहीं सकते विकल्प को चुना।