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अमर उजाला पोल : देश के सभी धार्मिक स्थलों में महिला और पुरुषों को समानता से प्रवेश मिलना चाहिए

Sat, 29 Sep 2018 07:45 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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केरल के सबरीमला स्थित अय्यप्पा मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं के प्रवेश का रास्ता साफ हो गया है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय पीठ ने 4:1 के बहुमत के फैसले में कहा कि मंदिर में महिलाओं को प्रवेश से रोकना लैंगिक आधार पर भेदभाव है और यह प्रथा हिंदू महिलाओं के अधिकारों का उल्लंघन करती है। 

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सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय पीठ ने मामले में चार अलग-अलग फैसले लिखे। न्यायमूर्ति आर. एफ. नरीमन और न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ ने मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति ए. एम. खानविलकर के फैसले से सहमति व्यक्त की जबकि न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा का फैसला बहुमत के विपरीत था। 

अमर उजाला डॉट कॉम ने इस मुद्दे पर ऑनलाइन पोल में सवाल पूछा था कि 'क्या देश के सभी धार्मिक स्थलों में महिला और पुरुषों को समानता से प्रवेश मिलना चाहिए?' इस सवाल पर 86.7 प्रतिशत लोगों का मानना है कि देश के सभी धार्मिक स्थलों में महिला और पुरुषों को समानता से प्रवेश मिलना चाहिए। वहीं, 13.3 प्रतिशत लोगों का मानना है कि देश के सभी धार्मिक स्थलों में महिला और पुरुषों को समानता से प्रवेश नहीं मिलना चाहिए। 

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