उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को सवाल किया कि लोग पटाखा उद्योग के पीछे क्यों पड़े हैं जबकि ऐसा लगता है कि इसके लिए वाहन प्रदूषण कहीं अधिक बड़ा स्रोत हैं। शीर्ष अदालत ने केंद्र से जानना चाहा कि क्या उसने पटाखों और आटोमोबाइल से होने वाले प्रदूषण के बीच कोई आनुपातिक अध्ययन कराया है।
पीठ ने टिप्पणी की कि पटाखा उद्योग में कार्यरत लोगों का रोजगार चला गया जबकि न्यायालय बेरोजगारी बढ़ाना नहीं चाहता है। न्यायमूर्ति एस ए बोबडे और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की पीठ ने केन्द्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सालिसीटर जनरल एएनएस नाडकर्णी से जानना चाहा, क्या पटाखों से होने वाले प्रदूषण और आटोमोबाइल से होने वाले प्रदूषण के बारे में कोई तुलनात्मक अध्ययन किया गया है?
ऐसा लगता है कि आप पटाखों के पीछे भाग रहे हैं जबकि प्रदूषण में इससे कहीं अधिक योगदान करने वाले शायद वाहन हैं। पीठ ने देश भर में पटाखों के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के लिये दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में दलील दी गयी है कि इनकी वजह से प्रदूषण में वृद्धि होती है।
इसी विषय पर अमर उजाला डॉट कॉम ने ऑनलाइन पोल में अपने पाठकों से सवाल पूछा था 'वायु प्रदूषण के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार कारण कौन से हैं?'
पोल के जवाब में हमें कुल 5220 वोट मिले। इनमें 66.53 फीसदी (3473 वोट) पाठकों ने माना कि वायु प्रदूषण के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार वाहन हैं, 27.97 फीसदी (1460 वोट) पाठकों ने कहा कि वायु प्रदूषण के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार कारखाने हैं, जबकि 5.5 फीसदी (287 वोट) पाठकों ने माना कि वायु प्रदूषण के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार पटाखे हैं।