सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर मचे बवाल के बीच त्रावणकोर देवासम बोर्ड (टीडीबी) ने सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को याचिका दाखिल कर आदेश पर अमल के लिए और वक्त मांगा। सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर को 10 से 50 वर्ष की बच्चियों और महिलाओं के मंदिर में प्रवेश पर पाबंदी खत्म कर दी थी।
बोर्ड ने याचिका में कहा कि आदेश को तत्काल लागू करने के लिए उसके पास जरूरी साधन नहीं है। लोग हिंसा और विद्रोह पर उतर आए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 13 नवंबर को सभी पुनर्विचार याचिकाओं पर खुली अदालत में सुनवाई का आदेश दिया था। लेकिन, 28 सितंबर के आदेश पर रोक से इनकार कर दिया था। वकील मैथ्यु नेदुम्पारा ने 14 नवंबर को मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ से कहा था कि 28 सितंबर के फैसले पर रोक लगाई जाए। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि 22 जनवरी, 2019 तक इंतजार कीजिए। उसी दिन सभी पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई करेंगे।
इसी विषय पर अमर उजाला डॉट कॉम ने ऑनलाइन पोल में अपने पाठकों से सवाल पूछा था 'क्या सबरीमाला मंदिर में प्रवेश का नियम लागू करने के लिए और समय की मांग सही है?'
पोल के जवाब में 50.44 फीसदी पाठकों ने माना कि सबरीमाला मंदिर में प्रवेश का नियम लागू करने के लिए और समय की मांग सही नहीं है, जबकि 49.56 फीसदी पाठकों ने कहा कि सबरीमाला मंदिर में प्रवेश का नियम लागू करने के लिए और समय की मांग करना सही है।