सोशल मीडिया की बढ़ती पहुंच और लोकप्रियता ने सुविधाओं के साथ-साथ कई सवाल भी खड़े किए हैं। एक पक्ष सोशल मीडिया को अफवाहें और फेक न्यूज फैलाने का जरिया मानता है तो दूसरा पक्ष इसे अभिव्यक्ति की आजादी का साधन नाम देता है। हालांकि, हर वस्तु का एक सकारात्मक और नकारात्मक पक्ष होता है लेकिन यदि नकारात्मक पक्ष का प्रभाव पहले से ज्यादा बढ़ जाए तो यह हानिकारिक ही होता है।
इसी को लेकर हमने ऑनलाइन पोल में अपने पाठकों से सवाल पूछा था कि क्या आपको लगता है कि सोशल मीडिया को अफवाह फैलाने का हथियार बना लिया गया है? इस सवाल के जवाब में कुल 5711 वोट बड़े। इनमें 90.35 प्रतिशत लोगों मे माना कि सोशल मीडिया को अफवाहें फैलाने का हथियार बना लिया गया है। वहीं, मात्र 9.65 प्रतिशत लोगों ने इसके विपक्ष में वोट किया।