बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने निजी क्षेत्र में आरक्षण की वकालत की है। उन्होंने कहा कि उनकी राय से निजी क्षेत्र में भी आरक्षण होना चाहिए और इस पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस होनी चाहिए।
आउटसोर्स जॉब में आरक्षण के फैसले पर राजनीतिक खींचतान के बीच नीतीश ने कहा कि जिनको आरक्षण की जानकारी नहीं है, वही सवाल उठा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जिस काम का भुगतान सरकार कर रही हो, उसमें आरक्षण एक्ट का पालन करना ही पड़ेगा। जो प्लेसमेंट एजेंसी या आउटसोर्सिंग कंपनी मानव संसाधन मुहैया कराती है वहां से सरकारी विभागों में नियुक्ति के लिए चयन में ही नई नीति लागू होगी।
अमर उजाला ने ऑनलाइन पोल कराया और पाठकों से सवाल पूछा, "बिहार के सीएम नीतीश कुमार के प्राइवेट सेक्टर में आरक्षण की मांग से क्या आप सहमत हैं?" ऑनलाइन पोल में पाठकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कुल 12,963 पाठकों ने भाग लिया।
69.11 फीसदी यानि 8959 पाठकों ने निजी क्षेत्र में आरक्षण का विरोध करते हुए कहा कि नीतीश कुमार के इस मांग से वो सहमत नहीं हैं। वहीं, 29.45 फीसदी यानि 3817 पाठकों ने नीतीश कुमार की इस मांग पर सहमति जताई और माना कि निजी क्षेत्र में आरक्षण होना चाहिए। मात्र 1.44 फीसदी यानि 187 पाठक कह नहीं सकते विकल्प को चुना।