लोकसेवकों को बचाने वाला बिल राजस्थान विधानसभा में पेश हो गया। इसके तहत सांसद-विधायक, जज और अफसर के खिलाफ मामला दर्ज करवाना अब आसान नहीं होगा। इनके खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज करवाने से पहले सरकार से इजाजत लेनी होगी।
इस प्रस्तावित बिल के अनुसार, ड्यूटी के दौरान यदि नौकरशाहों के खिलाफ कोई शिकायत है और उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करानी है, तो उसके लिए पहले राज्य सरकार से मंजूरी लेनी होगी। इस बिल में 180 दिन की समयावधि भी रखी गई है।
बिल के मसौदे के अनुसार यदि सरकार की स्वीकृति से पूर्व आरोपी कर्मचारी या अधिकारी का नाम मीडिया रिपोर्ट्स में आता है, तो ऐसे मामलों में दो वर्ष की सजा का प्रवाधान है। 'दंड विधियां (राजस्थान संशोधन) अध्यादेश, 2017' को लेकर राजस्थान की राजे सरकार देशभर के मीडिया के साथ विपक्ष के निशाने पर भी है। कांग्रेस इस बिल के विरोध में विरोध प्रदर्शन कर रही है। वहीं आम आदमी की नाराजगी बिल के विरोध में सोशल मीडिया पर दिख रही है।
इस विषय पर अमर उजाला डॉट.कॉम ने पोल कराया और पाठकों से सवाल पूछा कि 'क्या जनप्रतिनिधि-अधिकारियों के खिलाफ शिकायत से पहले लेनी होगी सरकार की अनुमति' क्या आप राजस्थान सरकार के इस कदम से सहमत हैं? इस सवाल के जवाब में पाठकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
कुल 9238 पाठकों ने पोल में हिस्सा लिया। 13.22 फीसदी यानि 1221 पाठकों ने माना कि राज्य सरकार का यह फैसला सही है। जबकि 85.43 फीसदी पाठक यानि 7892 फीसदी पाठक उपरोक्त सवाल से सहमत नहीं हुए। वहीं, 1.35 फीसदी यानि 125 पाठकों ने कह नहीं सकते विकल्प को चुना।