यूपी में पहले चरण का चुनाव संपन्न हो चुका है, वहीं दूसरे चरण के लिए 15 फरवरी को वोटिंग होनी है। तमाम सियासी पार्टियां चुनाव प्रचार में एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रही हैं। सपा और कांग्रेस गठबंधन की ओर से जहां मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और राहुल गांधी ने प्रचार की कमान संभाल रखी है। वहीं बीजेपी की ओर से पीएम नरेंद्र मोदी सहित पार्टी कई बड़े नेता दिन-रात एक किए हुए हैं। बीएसपी सुप्रीमो मायावाती अकेले ही पार्टी की कमान संभाल रखी हैं।
ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या चुनाव प्रचार के जरिए मतदाता को अपने पक्ष में किया जा सकता है। ये सवाल इसलिए उठ रहे हैं कि क्योंकि कांग्रेस और सपा के गठबंधन के बाद राजनीतिक गलियारे में चर्चा रही की राहुल-अखिलेश के एक साथ प्रचार करने से इन दोनों पार्टियों को फायदा मिल सकता है। खासकर बीजेपी को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
अमर उजाला ऑनलाइन पाठकों से इस संबंध में पोल कराया। पाठकों से सवाल पूछा गया कि, "क्या राहुल-अखिलेश के एक साथ प्रचार करने से बीजेपी को नुकसान होगा?" इस सवाल के जवाब में 15026 पाठकों ने हिस्सा लिया। पोल में हिस्सा लेने वाले पाठकों में हां और नहीं को लेकर दिलचस्प मुकाबला हुआ। हालांकि, 53.05 फीसदी यानि 7972 पाठकों ने माना कि राहुल-अखिलेश के एक साथ प्रचार करने से बीजेपी को नुकसान नहीं होगा। वहीं 44.62 फीसदी यानि 6705 पाठकों का मानना है कि राहुल-अखिलेश के एक साथ प्रचार करने से बीजेपी को नुकसान होगा। 2.33 फीसदी यानि 350 लोगों ने कह नहीं सकते, विकल्प को चुना।