लोकसभा के अंतिम सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए अपनी सरकार की उपलब्धियों का लेखा-जोखा पेश किया। यह उनका लोकसभा में दिया दिया आखिरी भाषण था। इसके बाद चुनाव के बाद जो सरकार चुनकर आएगी वह लोकसभा में भाषण देगी। अपने अंतिम भाषण की शुरुआत पीएम ने सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की कविता से की। उन्होंने भ्रष्टाचार से लेकर रक्षा सौदों की दलाली तक और सेवा भाव से लेकर पैसे लेकर विदेश भागने तक हर मुद्दे को छुआ।
अपने आखिरी भाषण में पीएम मोदी ने कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। अपने संबोधन की शुरुआत में उन्होंने सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की एक कविता की कुछ पंक्तियां भी सुनाईं। जो इस तरह हैं। 'जब कभी झूठ की बस्ती में, सच को तड़पते देखा है, तब मैंने अपने भीतर किसी, बच्चे को सिसकते देखा है। अपने घर की चारदिवारी में, अब लिहाफ में भी सिहरन होती है, जिस दिन से किसी को गुर्बत में, सड़कों पर ठिठुरते देखा है।'
इसी विषय पर अमर उजाला डॉट कॉम ने ऑनलाइन पोल में अपने पाठकों से सवाल पूछा था 'क्या पीएम मोदी ने लोकसभा में आक्रामक भाषण देकर चुनावी शंखनाद कर दिया है?
पोल के जवाब में हमें कुल 4767 वोट मिले। इनमें 85.42 फीसदी (4072 वोट) पाठकों ने माना कि पीएम मोदी ने लोकसभा में आक्रामक भाषण देकर चुनावी शंखनाद कर दिया है, जबकि 14.58 फीसदी (695 वोट) पाठकों ने माना कि पीएम मोदी ने लोकसभा में आक्रामक भाषण देकर चुनावी शंखनाद नहीं किया है।