पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टी एस कृष्णमूर्ति ने राजनीतिक पार्टियों के पहले के रिकॉर्ड को देखते हुए राजनीति को ‘‘अपराध मुक्त’’ करने के लिए विधायिका द्वारा किसी तरह का कानून बनाए जाने पर मंगलवार को संदेह जाहिर किया। कृष्णमूर्ति बताया कि अगर इस तरह का कानून बनाया जाता है, तो इसका स्वागत किया जाएगा। लेकिन दुर्भाग्यवश, राजनीतिक दलों ने अपराधों को लेकर आरोपित लोगों के चुनाव लड़ने पर रोक लगाने वाला कानून बनाने में बहुत कम रूचि दिखाई है।
उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को एक फैसले में कहा कि चुनाव लड़ने से पहले प्रत्येक उम्मीदवार को अपना आपराधिक रिकॉर्ड निर्वाचन आयोग के समक्ष घोषित करना होगा। साथ ही, न्यायालय ने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में राजनीति का अपराधीकरण चिंता का विषय है। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा कि नागरिकों को अपने उम्मीदवारों का पिछला रिकॉर्ड जानने का पूरा अधिकार है।
इसी मुद्दे पर अमर उजाला डॉट कॉम ने ऑनलाइन पोल में सवाल पूछा था कि 'क्या आप चाहते हैं कि आपके क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाला व्यक्ति साफ-सुथरी छवि का हो?' इस पर लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया दी। 93.72 प्रतिशत लोगों का मानना है कि जनता चाहती है कि का प्रतिनिधित्व करने वाला व्यक्ति साफ-सुथरी छवि का हो। वहीं, 6.28 प्रतिशत लोगों का मानना है जनता चाहती है कि का प्रतिनिधित्व करने वाला व्यक्ति साफ-सुथरी छवि का न हो।