जम्मू-कश्मीर में रमजान के दौरान सेना और दूसरे सुरक्षा बल आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करेंगे। यह रोक सशर्त है। यानी आतंकवादी हमले और पत्थरबाजी की सूरत में सुरक्षा बलों को जवाबी कार्रवाई करने की पूरी छूट होगी।
केंद्र ने लंबे सलाह-मशविरे के बाद मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती का कार्रवाई स्थगित करने का अनुरोध मान लिया। इस कदम को कश्मीर घाटी में शांति का माहौल बनाने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय के प्रवक्ता के मुताबिक, गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने खुद सीएम महबूबा को इस फैसले की जानकारी दी। यह फैसला पीएम नरेंद्र मोदी के जम्मू-कश्मीर दौरे से दो दिन पहले किया गया है। सीएम महबूबा मुफ्ती और नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने केंद्र के इस फैसले का स्वागत किया है। वहीं आतंकी संगठन लश्कर-ए-ताइबा ने कार्रवाई रोकने के फैसले को खारिज कर दिया है।
इस विषय पर अमर उजाला डॉट.कॉम ने पोल कराया और पाठकों से सवाल पूछा कि 'क्या रमजान के दौरान आंतकवादियों के खिलाफ कार्रवाई न करने से अमन कायम होगा?' सवाल के जवाब में पाठकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
कुल 3990 पाठकों ने पोल में हिस्सा लिया। 13.31 फीसदी (531 वोट) पाठकों ने माना कि रमजान के दौरान आंतकवादियों के खिलाफ कार्रवाई न करने से अमन कायम होगा। जबकि 86.69 फीसदी (3459) पाठकों ने माना कि रमजान के दौरान आंतकवादियों के खिलाफ कार्रवाई न करने से अमन कायम नहीं होगा।