नोटबंदी के दो उद्देश्य थे। पहला कालेधन को खत्म करना और दूसरा कैशलेस अर्थव्यवस्था की ओर कदम बढ़ाना। पहले उद्देश्य की हवा उसी वक्त निकल गई थी जब आरबीआई ने 99 फीसदी नोटों के सिस्टम में वापस आने की पुष्टि की थी। वहीं हालिया जानकारी से यह भी साबित हो गया कि नोटबंदी का दूसरा उद्देश्य भी फेल हो गया है।
देश की जनता के हाथ में इस समय 18.5 लाख करोड़ की नकदी है जबकि नोटबंदी से पहले 5 जनवरी 2016 को यह राशि 17 लाख करोड़ रुपये थी। भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों से यह जानकारी सामने आई है। नोटबंदी के दौर की बात करें तो उस दौरान जनता के हाथ में नकदी सिमट कर करीब 7.8 लाख करोड़ रुपये रह गई थी।
इस विषय पर अमर उजाला डॉट.कॉम ने पोल कराया और पाठकों से सवाल पूछा कि 'नोटबंदी के फैसले पर मोदी सरकार पास या फेल?' सवाल के जवाब में पाठकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
कुल 3623 पाठकों ने पोल में हिस्सा लिया। 69.58 फीसदी (2521 वोट) पाठकों ने माना कि नोटबंदी के फैसले पर मोदी सरकार पास है। जबकि 30.42 फीसदी (1102) पाठकों ने माना कि नोटबंदी के फैसले पर मोदी सरकार फेल है।