अपनी विभिन्न मांगों को लेकर नासिक से पैदल मार्च करके मुंबई पहुंचे 35000 से अधिक किसानों की आवाज राज्य सरकार ने सुन ली है। महाराष्ट्र सरकार ने किसानों के प्रतिनिधि मंडल के साथ करीब तीन घंटे चली बैठक के बाद उनकी सभी मांगों को पूरा करने का वादा किया है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि हमने किसानों की अधिकतर मांगें मान ली हैं और उनको इस बारे में लिखित में आश्वासन भी दिया है। वहीं किसानों ने भी आंदोलन खत्म करने का आश्वासन दिया है।
गौरतलब है कि इससे पहले ये किसान पिछले छह दिन से गरमी के बीच पैदल ही 180 किलोमीटर की दूरी तय कर रविवार को मुंबई पहुंचे। और सोमवार को किसी भी हालत में लोन माफी की मांग के साथ फॉरेस्ट राइट एक्ट के साथ- साथ कृषि न्यूनतम मूल्य निर्धारण जैसी विभिन्न मांगों के लेकर किसानों ने आज विधानसभा का घेराव किया।
बता दें कि किसान मांग कर रहे हैं कि बीते साल सरकार ने कर्ज माफी का जो वादा किसानों से किया था उसे पूरी तरह से लागू किया जाए। किसानों का कहना है कि स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू किया जाए और गरीब और मझौले किसानों के कर्ज माफ किए जाएं। इसके साथ ही किसान आदिवासी वनभूमि के आवंटन से जुड़ी समस्याओं के निपटारे की भी मांग कर रहे हैं ताकि आदिवासी किसानों को उनकी जमीनों का मालिकाना हक मिल सके।
इसी विषय पर अमर उजाला डॉट कॉम ने ऑनलाइन पोल में अपने पाठकों से सवाल पूछा था 'क्या महाराष्ट्र का किसान आंदोलन राज्य सरकार के लिए बड़ी मुसीबत बन सकता है?'
पोल के जवाब में हमें कुल 2,868 वोट मिले। इनमें 74.72 फीसदी (2,143 वोट) पाठकों ने माना कि महाराष्ट्र का किसान आंदोलन राज्य सरकार के लिए बड़ी मुसीबत बन सकता है, जबकि 25.28 फीसदी (725 वोट) पाठकों ने सवाल के जवाब में असहमति जताते हुए कहा कि महाराष्ट्र का किसान आंदोलन राज्य सरकार के लिए बड़ी मुसीबत नहीं है।