उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, बसपा सुप्रीमो मायावती, केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी और सपा नेता आजम खान के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी चुनाव आयोग के रडार पर हैं। पीएम पर पिछले सप्ताह महाराष्ट्र की चुनावी सभा में पहली बार वोट करने वाले युवाओं से पुलवामा और बालकोट के नाम पर वोट करने की अपील पर एससीसी उल्लंघन करने की शिकायत कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने की थी। इस पर आयोग को महाराष्ट्र के निर्वाचन अधिकारी से रिपोर्ट और भाषण की वीडियों और उसका यथा शब्दांश चुनाव आयोग को भेजा है। इस रिपोर्ट में प्रथम दृष्टया पीएम के भाषण को आचार संहिता उल्लंघन के दायरे में रखा है। अब इस आधार पर चुनाव आयोग को फैसला करना है।
इसी क्रम में आयोग राहुल गांधी के राफेल संबंधी बयानों पर भी गंभीर मंत्रणा कर रहा है। राहुल गांधी की शिकायत शनिवार को निर्मला सीतारमण की अगुवायी में भाजपा के प्रतिनिधि मंडल ने चुनाव आयोग से की थी। आयोग से मुलाकात केबाद निर्मला ने आरोप लगाया था कि राहुल गाली गैंग के मुखिया है वह प्रधानमंत्री के खिलाफ बिना सबूत के झूठा प्रचार करते हैं। इसलिए उन्होंने आयोग से सबसे पुरानी पार्टी के मुखिया के खिलाफ एमसीसी के तहत कार्रवाई का अनुरोध किया था। आयोग के सूत्रों के हवाले से मिली खबर के मुताबिक भाजपा की शिकायत पर आयोग गंभीरता के साथ जांच करा रहा है। इस मामले में फाइनल रिपोर्ट आने के बाद आयोग आगे की कार्रवाई करेगा। इसमें राहुल गांधी को नोटिस किया जा सकता है या फिर उनसे जवाबदेही तय करने को कहा जा सकता है।
इसी विषय पर अमर उजाला डॉट कॉम ने ऑनलाइन पोल में अपने पाठकों से सवाल पूछा था 'क्या अभद्र बयान और भाषणबाजी करने वाले नेताओं के चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगना चाहिए?'
पोल के जवाब में हमें कुल 5,959 वोट मिले। इनमें 93.81 फीसदी (5,590 वोट) पाठकों ने माना कि अभद्र बयान और भाषणबाजी करने वाले नेताओं के चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगना चाहिए। जबकि 6.19 फीसदी (3,69 वोट) पाठकों ने कहा कि अभद्र बयान और भाषणबाजी करने वाले नेताओं के चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध नहीं लगना चाहिए।