केंद्र सरकार की पहल पर कश्मीर में पवित्र रमजान माह के दौरान एकतरफा संघर्ष विराम से आतंकवाद रोधी कार्रवाई पर रोक लगी हुई है। इन सबके बीच सुरक्षा एजेंसियों ने आतंकी गुटों में स्थानीय युवकों की भर्ती बढ़ने को लेकर आगाह किया है। एजेंसियों के अनुसार, यह आंकड़ा 80 को पार कर गया है और नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर कई ओर से घुसपैठ की घटनाओं में भी बढ़ोतरी हुई है।
सुरक्षा एजेंसी के अधिकारियों ने बताया कि दक्षिण कश्मीर में शोपियां और पुलवामा जिले सबसे ज्यादा आतंकवाद से प्रभावित हैं। यहां के युवा आईएसआईएस-कश्मीर और अंसार गजवात उल हिंद जैसे आतंकी गुटों में शामिल हो रहे हैं। ये गुट अल कायदा से मदद मिलने का दावा करते हैं। अकेले मई महीने में ही 20 युवक इन आतंकी गुटों में शामिल हुए हैं। इनमें गांदरबल का रऊफ भी शामिल है। रऊफ सरकारी पॉलीटेक्निक में डिप्लोमा कोर्स के चौथे सेमेस्टर का छात्र है।
पढ़े-लिखे युवा बन रहे आतंकी
इस साल आतंकी गुटों में शामिल होने वाले युवाओं में कई उच्च शिक्षित भी हैं। इनमें 26 वर्षीय जुनैद अशरफ सेहरई भी है जो कश्मीर यूनिवर्सिटी से एमबीए डिग्री धारी है। उसके पिता ने तहरीक ए हुर्रियत की कमान सैयद अली शाह गिलानी से थामी है। यह गुट पाकिस्तान समर्थक अलगाववादी संगठन है। इसके अलावा कुपवाड़ा निवासी और पीएचडी स्कॉलर मन्नान बशीर वानी भी आतंकी गुट में शामिल हुए है। उसने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है।
इस विषय पर अमर उजाला डॉट.कॉम ने पोल कराया और पाठकों से सवाल पूछा कि 'क्या पाकिस्तान तो नहीं बनती जा रही है कश्मीर घाटी?' सवाल के जवाब में पाठकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
कुल 3117 पाठकों ने पोल में हिस्सा लिया। 82.07 फीसदी (2558 वोट) पाठकों ने माना कि कश्मीर घाटी पाकिस्तान बनती जा रही है। जबकि 17.93 फीसदी (559) पाठकों ने माना कि कश्मीर घाटी पाकिस्तान नहीं बनती जा रही है।सरकार वाकई पेट्रोल-डीजल के दामों में कटौती नहीं कर सकती। वहीं 11.12 फीसदी (476) ने कह नहीं सकते विकल्प को चुना।