माहवारी से गुजर रही मुस्लिम महिलाएं रोजा नहीं रखती हैं। सोशल मीडिया पर ऐसी महिलाएं रमजान के दिनों में खाने की चुनौतियों के बारे में चर्चा कर रही हैं। कुछ महिलाओं का कहना है कि वो छुपकर खाती हैं ताकि घर के पुरुषों को पता न चले जबकि अन्य का कहना है कि उन्हें माहवारी के बारे में झूठ बोलना पड़ता है। इसी विषय पर अमर उजाला डॉट कॉम ने ऑनलाइन पोल में अपने पाठकों से सवाल पूछा था 'क्या माहवारी को लेकर खुलकर बात करना गलत है?'
पोल के जवाब में हमें कुल 5024 वोट मिले। इनमें 76.95 फीसदी (3,866 वोट) पाठकों ने माना कि माहवारी को लेकर खुलकर बात करना गलत नहीं है, जबकि 23.05 फीसदी (1,158 वोट) पाठकों ने माहवारी को लेकर खुलकर बात करने को गलत ठहराया है।