दार्जिलिंग में लगातार हिंसा और बवाल जारी है। गोरखालैंड की मांग को लेकर दार्जिलिंग में विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। विरोध प्रदर्शनों का ये नया दौर कुछ समय से बंगाली भाषा को लादे जाने के विरोध में हो रहा है। दरअसल, ममता बनर्जी की अगुवाई में पश्चिम बंगाल सरकार ने बंगाली को पश्चिम बंगाल के सभी स्कूलों के लिए अनिवार्य बना दिया था। इस फैसले के विरोध में गोरखालैंड के अर्ध-स्वायत्तशासी इलाकों में हिंसा फैल गई। मौजूदा समय में दार्जिलिंग में सुरक्षा बलों के साथ ही आर्मी की भी तैनाती की गई है।
लगातार जारी हिंसा और बवाल से प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने लगी है। ऐसे में अमर उजाला ने अपने पाठकों से इस बारे में राय जाननी चाही। इसके लिए ऑनलाइन पोल आयोजित किया। पोल का सवाल था - क्या दार्जिलिंग में चल रहा विद्रोह पश्चिम बंगाल सरकार की प्रशासनिक विफलता का नतीजा है ?
पोल में पाठकों ने बढ़चढ़ कर भाग लिया। पोल के परिणाम इस प्रकार हैं।
- पोल में कुल 8172 लोगों ने भाग लिया।
- 76.14 फीसदी यानि 6222 लोगों का मानना है कि यह पश्चिम बंगाल सरकार की प्रशासनिक विफलता का नतीजा है।
- 20.56 फीसदी यानि 1680 लोगों का मानना है कि ऐसा नहीं है।
- जबकि 3.3 फीसदी यानि 270 लोग इस बारे में कोई राय नहीं रखते।