मीटू कैंपेन दुनियाभर में छाया हुआ है। इस कैंपेन के तहत आए दिन कई दिग्गजों पर आरोप लग रहे हैं। मीटू अभियान के चलते सिनेमा जगत सहित राजनीति के चेहरों पर भी गाज गिरी है। इसी के चलते एमजे अकबर ने राज्य विदेश मंत्री के पद से बुधवार को अपना इस्तीफा भी दे दिया है। उन पर मीटू अभियान के तहत एक दर्जन से ज्यादा महिलाओं ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। जिसके चलते विपक्ष लगातार उनपर दवाब बना रहा था।
भाजपा सरकार के साढ़े चार साल के कार्यकाल में पहली बार किसी मंत्री ने इस्तीफा दिया है। यौन उत्पीड़न के आरोपों में घिरे विदेश राज्य मंत्री एम जे अकबर मामले की गुरुवार को पटियाला हाउस कोर्ट में सुनवाई भी होगी। दूसरी तरफ मंत्री के खिलाफ गवाही देने वाली महिला पत्रकारों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। अब प्रिया रमानी समेत इस मामले में गवाही देने वाली पत्रकारों की संख्या 20 हो गई है। अमेरिका से शुरू हुए इस कैंपेन में पूरी दुनिया के लोग हिस्सा ले रहे हैं और इस कैंपेन के तहत सालों बाद कई खुलासे कर रहे हैं।
इसी विषय पर अमर उजाला डॉट कॉम ने ऑनलाइन पोल में अपने पाठकों से सवाल पूछा था 'क्या #MeToo के तहत हो रहे खुलासों का असर चुनावों पर भी पड़ सकता है?'
पोल के जवाब में हमें कुल 3,385 वोट मिले। इनमें 50.16 फीसदी (1,698 वोट) पाठकों ने माना कि हां #MeToo के तहत हो रहे खुलासों का असर चुनावों पर पड़ सकता है, जबकि 49.84 फीसदी (1,687 वोट) पाठकों ने कहा कि #MeToo के तहत हो रहे खुलासों का असर चुनावों पर नहीं पड़ेगा।