आतंकी गुटों को धन मिलने पर रोक न लगा पाने के कारण फाइनैंशल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) ने पाकिस्तान को निगरानी की इस सूची में डाला है। एफएटीएफ के फैसले के बाद इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अलग-थलग पड़ गए पाकिस्तान की मदद के लिए एक बार फिर चीन आगे आया है।
वहीं, पाकिस्तान को एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में डालने के फैसले का भारत और अमेरिका ने स्वागत किया है। इस मामले में शनिवार को विदेश मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि पाकिस्तान ने काफी उच्च स्तर पर वैश्विक चिंताओं के समाधान और फाइनेंशल एक्शन टास्ट फोर्स (एफएटीएफ) के मानक का पालन करने की राजनीतिक प्रतिबद्धता जताई थी। मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकियों को वित्तीय सहायता पर लगाम लगाने की बात की गई थी, लेकिन हाफिज सईद जैसे आतंकियों और जमात-उद-दावा, लश्कर जैसे संगठनों को जिस तरह की छूट पाकिस्तान में मिली हुई है यह एफआईटीएफ के मानकों के खिलाफ है।
इसी विषय पर अमर उजाला डॉट कॉम ने ऑनलाइन पोल में अपने पाठकों से सवाल पूछा था 'क्या फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स की कार्रवाई के बाद पाकिस्तान आतंकवाद पर रोक लगाएगा?'
पोल के जवाब में हमें कुल 1,965 वोट मिले। इनमें 26.26 फीसदी (516 वोट) पाठकों ने माना कि फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स की कार्रवाई के बाद पाकिस्तान आतंकवाद पर रोक लगाएगा, जबकि 73.74 फीसदी (1449 वोट) पाठकों ने सवाल के जवाब में असहमति जताते हुए कहा कि फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स की कार्रवाई के बावजूद पाक आतंकवाद पर रोक नहीं लगाएगा।