राज्यसभा में पेश तीन तलाक बिल यानि मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक-2017 बृहस्पतिवार को भी न तो पारित हुआ और न ही विपक्ष की मांग पर सेलेक्ट कमेटी को भेजा गया। बिल पर विपक्ष की ओर से पेश दोनों संशोधनों को सरकार ने नियम-कानूनों का हवाला देकर असंवैधानिक ठहराया है।
विपक्ष के कांग्रेसी नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा गतिरोध समाप्त हो सकता है और हम सरकार की मदद कर रहे हैं। हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि तीन तलाक के खिलाफ पूरा सदन है। हम मुस्लिम महिलाओं के हित की बात कर रहे हैं। जब सरकार खुद को उनका हितैषी बता रही है तो इस प्रावधान का क्या होगा जो बिल है।
अगर तलाकशुदा महिलाओं के पति जेल चले जाएंगे तो उन्हें खाना क्या सरकार खिलाएगी। महिलाओं और बच्चों का खर्चा कौन उठाएगा। इसका प्रावधान बिल में नहीं है। इस पर उपसभापति ने टोका कि बिल के गुण दोष पर चर्चा न करें।
इस विषय पर अमर उजाला डॉट.कॉम ने पोल कराया और पाठकों से सवाल पूछा कि 'क्या आप मानते हैं कि तीन तलाक बिल पर विपक्ष की आपत्तियां जायज है'? सवाल के जवाब में पाठकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
कुल 5150 पाठकों ने पोल में हिस्सा लिया। 30.41 फीसदी (1566 वोट) ने माना कि बिल पर विपक्ष की आपत्तियां जायज हैं। जबकि 68.64 फीसदी पाठकों (3535 वोट) ने कहा आपत्तियां जायज नहीं। वहीं, 0.95 फीसदी (49 वोट) पाठकों ने कह नहीं सकते विकल्प को चुना।