कर्नाटक में चले हाई वोल्टेज ड्रामे के बाद शनिवार को हुए बहुमत परीक्षण से पहले ही बीएस येदियुरप्पा ने सरेंडर करते हुए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद जेडीएस के अध्यक्ष एचडी कुमारस्वामी ने राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया। जिसके बाद राज्यपाल ने उन्हें सोमवार को शपथ ग्रहण के लिए आमंत्रित किया।
भले ही येदियुरप्पा बहुमत साबित करने में नाकाम रहे, मगर सोमवार को शपथ लेने वाली कुमारस्वामी सरकार की राह भी आसान नहीं होगी। मामूली बहुमत वाली संभावित सरकार के सामने विधायकों को साधे रखने की चुनौती होगी। भाजपा की निगाहें नतीजे आने वाले दिनों से ही कांग्रेस-जदएस से जीते 31 लिंगायत विधायकों पर है। ऐसे में थोड़ा सा भी असंतोष भावी सरकार की बलि ले सकता है।
इस विषय पर अमर उजाला डॉट.कॉम ने पोल कराया और पाठकों से सवाल पूछा कि 'क्या कांग्रेस और जनता दल सेक्युलर का गठबंधन लंबी रेस का घोड़ा साबित होगा?' सवाल के जवाब में पाठकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
कुल 4055 पाठकों ने पोल में हिस्सा लिया। 39.65 फीसदी (1608 वोट) पाठकों ने माना कि कांग्रेस और जनता दल सेक्युलर का गठबंधन लंबी रेस का घोड़ा साबित होगा। जबकि 60.35 फीसदी (2447) पाठकों ने माना कि कांग्रेस और जनता दल सेक्युलर का गठबंधन लंबी रेस का घोड़ा साबित नहीं होगा।