हिमाचल विधानसभा चुनाव की जंग पहले ही कांग्रेस पार्टी मैदान से बाहर नजर आ रही है। वजह है सोनिया गांधी का चुनाव के बिगुल बजने के बाद अब तक कोई चुनावी रैली न करना। चुनाव प्रचार के खत्म होने में अब महज दो दिन शेष रह गए हैं। हालांकि, राहुल गांधी सोमवार को कांगड़ा में आयोजित एकमात्र रैली को संबोधित किया।
पीएम मोदी ने रविवार को एक जनसभा में कहा कि पिछले बीस साल में उन्होंने कई चुनाव करवाए, लेकिन यह पहला मौका है जब हार के डर से कांग्रेस का कोई बड़ा नेता हिमाचल नहीं आया। कांग्रेस के मैदान छोड़ देने से लड़ाई का मजा नहीं आ रहा।
जबकि दूसरी ओर सूबे की सत्ता हासिल करने के लिए भाजपा की ओर से पीएम मोदी ने चुनाव के ऐलान के बाद 7 चुनावी सभाएं की हैं। इसके अलावा पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी कई चुनावी सभाओं को संबोधित कर चुके हैं।
वहीं सूबे के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह अपनी चुनावी सभाओं में रुपए की कमी का हवाला देते हुए पार्टी के आर्थिक तंगी का रोना रो रहे हैं। वह अपने काम को गिनाने के बजाय जनता के सामने पीएम मोदी के प्रभाव और अपनी तंगी का ही रोना रो रहे हैं।
इस विषय पर अमर उजाला डॉट.कॉम ने पोल कराया और पाठकों से सवाल पूछा कि 'हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में क्या कांग्रेस मैदान छोड़ती दिखाई दे रही है? इस सवाल के जवाब में पाठकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
कुल 11,254 पाठकों ने पोल में हिस्सा लिया। 56.95 फीसदी (6409) पाठकों ने माना कि कांग्रेस मैदान छोड़ती दिखाई दे रही है। जबकि 40 फीसदी पाठकों (4502) का कहना है कि कांग्रेस मैदान छोड़ती नहीं दिखाई दे रही है। वहीं, 3.05 फीसदी (343) पाठकों ने कह नहीं सकते विकल्प को चुना।