नोटबंदी के बीच केंद्रिय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने पॉलिसी रेपो रेट पर बड़ा फैसला लिया है। रेपो रेट 6.25 फीसदी रहेगा, वहीं रिवर्स रेपो 5.75 फीसदी ही रहेगा। नोटबंदी के बाद देश में बैंकों के सामने अतिरिक्त कैश की समस्या को देखते हुए रिजर्व बैंक ने उन्हें ब्याज दरों के जरिए किसी भी तरह की राहत देने से मना कर दिया है।
लिहाजा, अब आपकी ईएमआई जस की तस बनी रहेगी। बाजार को उम्मीद थी कि नोटबंदी के दबाव से बाहर निकालने के लिए रिजर्व बैंक कम से कम 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती कर सकता है लेकिन बाजार को मायूस करते हुए रिजर्व बैंक ने रेपो रेट को 6.25 फीसदी पर बरकरार रखा है। आरबीआई के इस फैसले के बाद लोन की दरे जस की तस रहेंगी।
नोटबंदी के बीच आरबीआई के इस फैसले पर अमर उजाला ने पोल किया। पोल में सवाल पूछा, 'कैश की किल्लत से जूझ रहे आम आदमी को सस्ते लोन की राहत मिलनी चाहिए थी?' पोल में कुल 9,559 पाठकों ने हिस्सा लिया। सबसे अधिक 85.52 फीसदी यानि 8,175 पाठकों का मानना है कि कैश की किल्लत से जूझ रहे आम आदमी को सस्ते लोन की राहत मिलनी चाहिए। 11.73 फीसदी यानि 1,121 पाठकों ने आम आदमी को सस्ते लोन की राहत नहीं मिलनी चाहिए। वहीं 2.75 फीसदी यानि 263 पाठकों ने कह नहीं सकते विकल्प को चुना।