सुप्रीम कोर्ट के एक नए आदेश के बाद देश में चुनावों की दशा और दिशा दोनों ही बदल सकती हैं।
अदालत ने कहा है कि चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों को अपनी आय के साथ ही साथ अपने परिजनों की आय का ब्योरा भी देना होगा। इससे यह भी पता लगेगा कि प्रत्याशियों की पत्नी और बच्चों की आय व संपत्ति कितनी है।
एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश जे चेलामेश्वर और न्यायाधीश एस अब्दुल नजीर की बेंच ने यह फैसला दिया। एक गैर सरकारी संस्था लोक प्रहरी ने सर्वोच्च न्यायालय में इस संबंध में याचिका दायर की थी।
इस विषय पर अमर उजाला डॉट.कॉम ने पोल कराया और पाठकों से सवाल पूछा कि 'क्या परिजनों की संपत्ति का ब्योरा देने से हमारे देश में होने वाले चुनावों में पारदर्शिता बढ़ेगी?' सवाल के जवाब में पाठकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
कुल 2332 पाठकों ने पोल में हिस्सा लिया। 75.47 फीसदी (1760 वोट) ने माना कि परिजनों की संपत्ति का ब्योरा देने से चुनावों में पारदर्शिता बढ़ेगी। जबकि 24.53 फीसदी (572) पाठकों ने माना कि परिजनों की संपत्ति का ब्योरा देने से चुनावों में पारदर्शिता नहीं बढ़ेगी।